बागेश्वर। दूर संचार क्रांति के तमाम दावों के बावजूद कांडा तहसील के कमस्यारघाटी के करीब 30 गांवों के लोग संचार सेवा से महरूम हैं। इस बड़े भू-भाग के लिए बीएसएनएल समेत किसी भी कंपनी ने टावर लगाने की जहमत नहीं उठाई है। मोबाइल फोनों पर बात करने के लिए 10 से 20 किमी और इंटरनेट चलाने के लिए लोग एक किमी की खड़ी चढ़ाई नापने को मजबूर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के तहत पंचायतों को दूर संचार और ब्रॉड बैंड सेवा उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है लेकिन केंद्र सरकार की आंखों से यह समूचा क्षेत्र अब भी ओझल है। क्षेत्र के लोगों ने अब इसे 2019 मेें मुद्दा बनाने की ठान ली है।
इंटरनेट नहीं होने के कारण युवा रोजगार के लिए ऑनलाइन आवेदन भी नहीं कर पाते हैं न ही उन्हें कोई जानकारी मिल पाती है। संचार सुविधा नहीं होने का बहाना बनाकर बैंक की शाखाएं भी स्थापित नहीं हो पा रही हैं। बैंक नहीं होने के कारण सरकारी गैर सरकारी विभागों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं, पारिवारिक पेंशन के लाभार्थियों और मनरेगा के मजदूरों को भुगतान प्राप्त करने में कई दिक्कतें हो रही हैं। विद्यालयों में रखे कंप्यूटर भी शोपीस बने हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सांसद बनने के बाद अजय टम्टा ने क्षेत्र का भ्रमण कर लोगों का आभार जताया था। तब उनसे क्षेत्र में शीघ्र मोबाइल फोन टावर स्थापित करने की मांग की गई थी लेकिन आज तक टावर नहीं लग सका है।
कमस्यार संघर्ष समिति के अध्यक्ष सतीश उप्रेती, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष कृपाल रावत, ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष राम लाल दास, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के अध्यक्ष बहादुर सिंह डसीला, पूर्व जिपं सदस्य बहादुर सिंह डसीला आदि ने केंद्र सरकार से जल्द टावर स्थापित करने की मांग की है।
- इन गांवों में नहीं है संचार की सुविधा
मलसूना, भैंसूड़ी, टर टकनार, कपूरी, खातीगांव, अठपैसिया, धौलियापाटा, रावतसेरा, भंडारीगांव, देवल बिछराल, खाड़ी, सिमायल, नरगोली, तुषरेड़ा, ठांगा, औलानी, मेहरखाली, झिटौली, पस्ट्यारी, कोट भंडार, चंतोला, देवतोली, देवलेत, पटौली, धारीमध्या, भैंसखाल, घोड़ाखाल, महतगांव, भंडारीसेरा, बगराटी आदि।
कमस्यार घाटी में मोबाइल फोन टावर लगवाने के लिए केंद्रीय सूचना मंत्री रवि शंकर प्रसाद को पत्र लिखा है। मंजूरी मिलते ही टावर की स्थापना हो जाएगी।
- बलवंत भौर्याल, विधायक, कपकोट।