पालीटेक्निक की चहारदीवारी साल 2013 में आई दैवी में बह गई
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बागेश्वर। अगले महीने मानसून दस्तक दे देगा, लेकिन शासन-प्रशासन की घोर उपेक्षा के चलते नगर पंचायत कपकोट के वार्ड नंबर तीन के बेलंग मोहल्ले में पांच साल पहले आई आपदा के जख्म नहीं भरे जा सके हैं। चिरपत गधेरे में बही पैदल के स्थान पर भी नए पुल, सिंचाई नहर का पुनर्निर्माण नहीं हो सका है। भारी बारिश से ध्वस्त मोहल्ले को जोड़ने वाली पगडंडी का भी पुनर्निर्माण नहीं किया गया है। आपदा से हुई क्षति का निर्माण न होने से लोगों में रोष है। कहा समय पर पुल का निर्माण न होने से लोगों का घरों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाएगा।
भीषण बारिश से 18 सितंबर 2013 को चिरपतकोट गधेरे में भीषण बाढ़ आ गई। जिससे बेलंग, मिछात, उछात को जोड़ने के लिए गधेरे पर बनी पैदल पुलिया बह गई थी। सीमेंट कंक्रीट से बनी पगडंडी भी कई जगह टूट गई थी। गधेरे से बनी कन्यूटी नहर का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। गधेरे के आसपास की उपजाऊ भूमि भी गधेरे की तेज बहाव में बह गई थी। दो लोगों के मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए थे। तब से आपदा के जख्म पूरे नहीं हो सके हैं। सिंचाई विभाग ने नहर में पाइप डालकर पानी चला तो रखा है लेकिन उसमें कई जगह रिसाव हो रहा है। खेतों में अपेक्षा से कम पानी पहुंचने से किसानों को कई परेशानियां झेेलनी पड़ रही हैं। लोगों का कहना है कि चिरतकोट गधेरे पर बरसात से पहले पैदल पुल का निर्माण नहीं हुआ तो बेलंग, उछात, मिछात, चिरपतकोट मंदिर जाने वालों को कई परेशानियां झेलनी पड़ेंगी। इसमें आने वाली बाढ़ से लोग न तो घरों से बाहर निकल पाएंगे और न ही बाहर आने वाले अपने घरों को नहीं आ सकेंगे। सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश चंद्र जोशी आदि ने शासन-प्रशासन से आपदा हुई क्षति की शीघ्र भरपाई की मांग की है।
पैदल पुलिया नहीं बनने से लोग परेशान
नहर का पुनर्निर्माण न होने से किसान परेशान