जिले की आधी से अधिक की आबादी की सुरक्षा व्यवस्था संसाधन विहीन राजस्व पुलिस के हाथों में है। विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के कारण अपराधों को नियंत्रण करने से लेकर किसी मामले में खुलासे को लेकर राजस्व पुलिस असहाय नजर आई है।
2.62 लाख की आबादी बागेश्वर जिले में कुल 940 गांव हैं, इनमें 847 आबाद ग्राम हैं। 2246 वर्ग किमी में फैले जिले में 60 पटवारी क्षेत्र हैं। इनमें से 30 क्षेत्र रेगुलर पुलिस के अधीन आते हैं, जबकि शेष 30 क्षेत्रों की कानून व्यवस्था का जिम्मा राजस्व पुलिस पर है। बागेश्वर तहसील क्षेत्र में तल्ला कत्यूर और दुग को छोड़कर बाकी ग्रामीण क्षेत्र राजस्व विभाग के अधीन हैं।
गरुड़ में दो पटवारी क्षेत्र ही पुलिस के पास है। शेष का राजस्व गांवों का जिम्मा पटवारी के पास है। कपकोट और कांडा का पूरा क्षेत्र रेगुलर पुलिस के पास है। जिले की छह तहसील और एक उप तहसील में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी लंबे समय से बनी हुई है।
हालात यह हैं कि तहसीलदारों के पांच पद रिक्त चल रहे हैं। जिले की बागेश्वर, कपकोट, गरुड़, कांडा, काफलीगैर, दुगनाकुरी तहसील और सामा उपतहसील का कामकाज तीन नायब तहसीलदार चला रहे हैं। कानूनगो के छह पदों में से मात्र एक ही कानूनगो तैनात है। पटवारियों के आधा दर्जन पद रिक्त चल रहे हैं।
अनुसेवकों के पद विभाग में समाप्त कर दिए गए हैं। जिले के सभी क्षेत्रों में बनाई गई पटवारी चौकियां उजाड़ पड़ी हैं। राजस्व क्षेत्र में कोई अपराध होने पर मुजरिम को लाने-ले जाने के लिए कोई वाहन तक विभाग के पास उपलब्ध नहीं रहता है। ऐसे में राजस्व क्षेत्रों में घटित होने वाली बड़ी आपराधिक घटनाओं का खुलासा करने के लिए राजस्व विभाग को रेगुलर पुलिस में मामले हस्तांतरित करने को मजबूर रहना पड़ता है।