बागेश्वर। बारिश के बाद नदियों के पानी में काफी मात्रा मेें सिल्ट आया। भारी सिल्ट की सफाई में जल संस्थान के ट्रीटमेंट प्लांट हांफ गए। नतीजतन, योजनाओं से काफी कम पानी मिल पाया। वहीं, लाइनों से मटमैले पानी की आपूर्ति हुई। मटमैले पानी किसी ने पीने को इस्तेमाल नहीं किया। लोगों को प्राकृतिक स्रोतों से पेयजल के लिए पानी ढोना पड़ा।
सोमवार सुबह से ही सरयू और गोमती के पानी ने रंग बदल लिया था। बारिश के बाद पहाड़ों से आया पानी अपने साथ काफी मात्रा में सिल्ट लेकर आया। अधिकांश पंपिंग योजनाएं सरयू पर बनी हैं। भारी सिल्ट के चलते पेयजल योजनाओं के ट्रीटमेंट प्लांट हांफ गए। ट्रीटमेंट प्लांट की सफाई के लिए बार-बार बैकवॉश लेना पड़ा।
इससे कम पानी फिल्टर हो पाया। दूसरी ओर, फिल्टरेशन के बाद भी पानी का मटमैलापन नहीं गया। जल संस्थान ने पेयजल समस्या से सर्वाधिक प्रभावित मंडलसेरा में टैंकरों के जरिए पानी बांटा। हालांकि जल संस्थान के टैंकरों से भी मटमैले पानी की ही आपूर्ति हुई। जीतनगर क्षेत्र में पानी की ज्यादा समस्या रही। ईई नंद किशोर ने बताया कि सिल्ट के चलते फिल्टरेशन का काम प्रभावित हुआ।
कीचड़ में फंसा जल संस्थान का टैंकर
सोमवार को जल संस्थान का टैंकर मंडलसेरा क्षेत्र में पानी बांट रहा था। इस बीच एक वाहन को पास देते समय टैंकर सड़क किनारे एक खेत में चला गया। बारिश के बाद पानी से लबालब भरे खेत में कीचड़ था। टैंकर ढाई घंटा कीचड़ में फंसा रहा। इससे पानी बांटने का काम ठप हो गया।