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जिले में स्टेडियम ही नहीं तो कैसे निखरेगी प्रतिभा

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बागेश्वर। जिला गठन के 20 साल बाद भी बागेश्वर में स्टेडियम का निर्माण नहीं हो सका है। जिस कारण खेल प्रतिभाएं पूर्वाभ्यास नहीं कर पा रही हैं। खेल विभाग जिले में स्टेडियम का निर्माण नहीं कर पा रहा है।

खेल स्टेडियम के निर्माण की प्रक्रिया बीते कई सालों से अधर में लटकी है। पहले तो प्रशासन लंबे समय तक स्टेडियम निर्माण के लिए जमीन ही नहीं तलाश पाया। अब स्टेडियम के निर्माण के लिए खेल विभाग को निकटवर्ती खोली गांव में जमीन तो मिल गई है लेकिन अब जमीन हस्तांतरण का मामला अटक गया है। तीन हेक्टेयर से अधिक भूमि वन विभाग की है। जिसे खेल विभाग को हस्तांतरित किया जाना है। जिला प्रशासन ने भूमि हस्तांतरण की फाइल तैयार कर नोडल अधिकारी देहरादून को भेजी है। बताया जा रहा है कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया काफी लंबी होगी जिससे जल्दी खेल स्टेडियम का निर्माण होना संभव नहीं लग रहा है। स्टेडियम नहीं होने के कारण बागेश्वर में खेल प्रतिभाओं को सुविधा नहीं मिल पा रही है। खेलों के ट्रायल के लिए भी खिलाड़ियों को जिले से बाहर जाना पड़ता है।
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पौने चार एकड़ में बनेगा स्टेडियम
बागेश्वर। खेल विभाग ने खोली गांव में स्टेडियम निर्माण के लिए पौने चार एकड़ भूमि तलाश की है। जिसमें कुछ जमीन तो ग्रामीणों की है, लेकिन तीन हेक्टेयर से अधिक भूमि वन विभाग की है। जिसके हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया काफी जटिल बताई जा रही है।
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कोट.............

खोली गांव में खेल स्टेडियम निर्माण के लिए जमीन चयनित की गई है। वन भूमि हस्तांतरण के लिए प्रक्रिया चल रही है। भूमि हस्तांतरित होते ही खेल स्टेडियम का निर्माण शुरू किया जाएगा।
- विनोद वाल्दिया, जिला खेल अधिकारी, बागेश्वर
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