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फाइलों में कैद दो मुख्यमंत्रियों की 195 घोषणाएं

Sun, 23 Oct 2016 11:12 PM IST
भक्त दर्शन पांडेय /अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
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 सरकार के पांच साल का कार्यकाल पूरा होने वाला है। लेकिन प्रदेश के दो-दो मुख्यमंत्रियों की ओर से बागेश्वर जिले में विकास कार्यों को लेकर की गई आधी घोषणाएं भी अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं। मुख्यमंत्रियों द्वारा वर्ष 2012 से 2015 तक की गई कुल 325 घोषणाओं में से 195 घोषणाएं जनपद, मंडल व निदेशालय से लेकर शासन स्तर तक में अटकी हुई हैं। 
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बागेश्वर और कपकोट विधान सभा क्षेत्रों में पूर्व सीएम विजय बहुगुणा और बाद में सत्ता संभालने वाले सीएम हरीश रावत ने साल 2012 से 2015 तक बागेश्वर जिले के भ्रमण के दौरान कुल 325 घोषणाएं की। इनमें से अभी तक केवल 116 घोषणाएं ही पूरी हुई हैं। जबकि 209 घोषणाएं अभी तक जिले से लेकर शासन स्तर तक में लंबित हैं। हालांकि 14 घोषणाएं निरस्त होने योग्य बताई जा रही है। इसके बाद भी 195 घोषणाएं शेष रह जाती हैं। इनमें बागेश्वर में महिला अस्पताल, बेस अस्पताल, कार पार्किंग, खेल मैदान, आडिटोरियम, नए विकासखंड, पेयजल, राष्ट्रीयकृत बैंक खोलने, गैस गोदामों का निर्माण, स्टेडियम, ऐलोपैथिक अस्पताल, नदियों में पुल निर्माण जैसी बड़ी योजनाओं की घोषणाएं भी शामिल हैं जिनकी अभी शुरुआत तक नहीं हुई है। जबकि यह लोगों की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी हुई घोषणाओं में शामिल हैं। इस समय 29 घोषणाएं जिला स्तर पर, नौ मंडल स्तर पर, 22 विभागाध्यक्ष, 44 निदेशालय, 23 नोडल अधिकारी/वन संरक्षक और 68 घोषणाएं शासन स्तर पर ही लंबित पड़ी हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि मुख्यमंत्रियों की घोषणाएं भी इसी तरह लंबित रही तो विकास को गति कैसे मिलेगी। 
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औपचारिकताएं पूरी कराने में लग रहा समय
सभी मुख्यमंत्रियों की घोषणाओं को पूरा कराया जाएगा। इसके लिए कई चरणों में जरूरी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसमें समय लगना स्वाभाविक है। 
- ललित फर्स्वाण
विधायक, कपकोट।
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