बागेश्वर। आपदा की मार के चलते जिले में नौ सड़कें बंद रहीं। इनके बंद रहने से 25 हजार की आबादी यातायात सेवा से वंचित रही। वाहनों की आवाजाही ठप होने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों को सड़क तक पहुंचने के लिए कई किमी पैदल चलना पड़ा।
बुधवार को भी कपकोट-पिंडारी, भयू-गडेरा, कपकोट-पोलिंग, पोथिंग-शोभाकुंड, हरसिला-पुड़कुनी, गैनार-लीती, शामा-लीती-गोगिना, धरमघर-माजखेत, बिजोरीझाल-ओखसों मोटर मार्ग भूस्खलन और मलबा आने से पूरी तरह बंद रहे। इससे इन मार्गों पर यातायात के लिए निर्भर 25 हजार लोग परेशान रहे। लोगों को कई किमी पैदल चलकर व कई वाहन बदलकर सफर करना पड़ा। इससे सफर में ज्यादा समय और धन खर्च हुआ।
इसके अलावा अल्मोड़ा-ग्वालदम मोटर मार्ग में मलबा आ गया। इससे दो घंटा तक राजमार्ग पर यातायात बाधित रहा। दोनों ओर वाहनों की कतार लगी रही। बाद में कार्यदायी संस्था ने जेसीबी से मलबा हटाकर यातायात सुचारु किया। दूसरी ओर शाता-लीती मोटर मार्ग भी मलबे से बंद हो गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि कार्यदायी संस्थाएं बंद सड़कों को सुचारु करने के प्रयास में जुटी हैं।
सड़क खोलने में हो रही ढिलाई
बागेश्वर। भूस्खलन और मलबा आने से बंद सड़कों को सुचारु करने में कार्यदायी संस्थाएं ढिलाई रही हैं। इसके चलते कई सड़कें लंबा समय बीतने के बाद भी नहीं खुल सकी हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी और पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने प्रशासन से सड़कें जल्द खुलवाने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़कें बंद होने से हजारों लोग एक-दूसरे से सीधे संपर्क से वंचित हो गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राशन आदि जरूरी सामान की किल्लत हो गई है। गर्भवती महिलाओं, रोगियों को अस्पताल पहुंचाना टेड़ी खीर साबित हो रहा है। सड़कें बंद होने से आपात हालातों में खतरा और बढ़ गया है। लेकिन कार्यदायी संस्थाएं मार्ग खोलने के काम में ढिलाई बरत रही हैं। जिपं अध्यक्ष और पूर्व विधायक ने कार्यदायी संस्थाओं पर समस्याओं की सुध न लेने का आरोप लगाया है। ब्यूरो