कपकोट (बागेश्वर)। उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में रसोई गैस की कोई व्यवस्था नहीं है। वहां लोग ईंधन के लिए पेड़ों पर निर्भर हैं। पेड़ों के कटने से हिमालय और पर्यावरण को खतरा बना हुआ है। क्षेत्र के लोगों ने हिमालय और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सरयू और पिंडरघाटी में रसोई गैस की एजेंसी स्थापित करने की मांग की है।
कपकोट ब्लॉक के उच्च हिमालयी क्षेत्र के सरयू और पिंडर घाटी की दूरी विकास खंड से 12 से 40 किमी है। दोनों घाटियों में 50 से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। क्षेत्र के लोगों को गैस के लिए तहसील मुख्यालय आना पड़ता है। उन्हें एक सिलेंडर का किराया दो से तीन सौ रुपये तक देना पड़ता है।
सिलेंडर का किराया अधिक होने के कारण ज्यादातर लोगों ने कनेक्शन नहीं लिए हैं। वहां ग्रामीणों को ईंधन के लिए पेड़ों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। क्षेत्र के जागरूक लोगों ने घाटियों के केंद्र बिंदु पर रसोई गैस एजेंसी और उसके डिपो की स्थापना शीघ्र करने की मांग की है।
मांग करने वालों में चौड़ास्थल को ब्लॉक बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष विक्रम दानू, मल्ला दानपुर विकास समिति के अध्यक्ष स्वरूप सिंह कर्म्याल, ग्राम प्रधान किशन सिंह दानू, जमन सिंह दानू, विमला देवी, राम चंद्र जोशी आदि शामिल हैं।