बागेश्वर। सरयू, गोमती और विलुप्त सरस्वती के पावन संगम पर स्थित भगवान बागनाथ के पौराणिक मंदिर पर क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था है। अनादिकाल में मार्कंडेय ऋषि को बाघ के रूप में दर्शन देने से शिवजी का नाम बागनाथ पड़ा। शिव महापुराण के अनुसार शिवजी यहां माता पार्वती के साथ विराजते हैं। मान्यता है कि बेलपत्र के साथ बागनाथ को 108 लोटा जल अर्पित करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मंदिर में पूजा कराने वाले पंडित हेम चंद्र जोशी बताते हैं कि भगवान बागनाथ थोड़े में ही प्रसन्न होने वाले देवता हैं। उन्हें बेलपत्र पत्र बहुत ही प्रिय हैं। जलार्पण के समय ऊं नम: शिवाय का उच्चारण जरूरी है। शिवजी को चंदन को लगाकर उन्हें सफेद वस्त्र धारण कराना चाहिए। चावल, मिठाई, फल और बताशे अर्पित करके घी का दीपक जलाना चाहिए। इसके बाद रुद्री पाठ करना चाहिए। मनौती पूरी होने पर लोग मंदिर में घंटी आदि चढ़ाते हैं। पहले यह मंदिर बहुत छोटा था। राजा लक्ष्मी चंद ने 1602 में मंदिर का भव्य निर्माण किया। मंदिर नागर शैली में बना है। मंदिर में पुजारी रावल परिवार जबकि पंत परिवार भोलेनाथ को भोग लगाने के लिए नियुक्त हैं।