खनन पर अगले चार माह तक प्रतिबंध लगाने के हाइकोर्ट के निर्देश के बाद बागेश्वर जिले में होने वाले करोड़ों के खड़िया खनन पर रोक लग जाएगी। खड़िया खनन पर रोक लगने से जहां करोड़ों का कारोबार प्रभावित होगा वहीं लगभग 15 हजार लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बेरोजगार हो जाएंगे। सरकार को भी बड़ा राजस्व घाटा उठाना पड़ेगा।
बागेश्वर जिले में बड़ी मात्रा में सोप स्टोन पाया जाता है। इस समय जिले के रीमा से लेकर कांडा क्षेत्र तक लगभग 75 खड़िया की खानें हैं। जिले में खड़िया खनन से हर साल लगभग 150 करोड़ का कारोबार होता है। इस कारोबार से लगभग 15 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। इसके अलावा डेढ़ सौ रुपये के कारोबार से लगभग 20 से 23 करोड़ का राजस्व भी हर साल सरकार की झोली में जाता है।
पहाड़ में हो रहे खनन के कारण पर्यावरण को हो रहे गंभीर खतरों को देखते हुए हाइकोर्ट द्वारा नदी नालों और वन भूमि के साथ ही सभी तरह के खनन पर अगले चार माह तक रोक लगा दी है। इस रोक के बाद जिले में खड़िया खनन पर भी प्रतिबंध लग जाएगा। खनन बंद होने से हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट तो गहराएगा ही साथ ही सरकार को भी बड़ा राजस्व घाटा उठाना पड़ेगा।
सोप स्टोन से पेपर, साबुन, टूथपेस्ट, टेलकम पाउडर, पॉलिस, सौंदर्य प्रसाधन की सामग्री निर्मित होती है। खड़िया की पेपर मिलों में सबसे अधिक डिमांड है। लंबे समय तक खड़िया का उत्पादन बंद होने से इससे बनने वाली कीमतों में भी उछाल आ सकता है।
बागेश्वर के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि अभी तक उन्हें इस संबंध का आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश की प्रति मिलते ही उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इधर खनन उपनिदेशक राजपाल लेघा ने बताया कि कोर्ट के आदेशों का पालन कराया जाएगा। जहां पर भी माइनिंग हो रही है उसे बंद कराया जाएगा।