बागेश्वर। राज्य के लिए संघर्ष करने वाले राज्य आंदोलनकारियों ने राज्य दिलाकर सफलता तो दिला दी, लेकिन एक अदद प्रमाण पत्र के लिए कई राज्य आंदोलनकारी सिस्टम से हार गए हैं। बीते 17 साल से प्रमाण पत्र की मांग को लेकर चल रही लड़ाई सड़क से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंची, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।
राज्य आंदोलनकारियों ने प्रमाण पत्र के लिए जुलूस प्रदर्शन व धरने का सहारा लिया। शासन स्तर पर भी कई बार वार्ता की गई। शासन प्रशासन के रवैये से निराश 352 राज्य आंदोलनकारियों ने हाईकोर्ट नैनीताल में रिट दायर की। उसका नतीजा यह रहा कि अदालत ने सरकार को आदेश दिया कि प्रमाण पत्र दिए जाएं। शासन ने प्रशासन को आदेश दिया कि उचित प्रमाण पत्र होने पर आंदोलनकारियों को प्रमाण पत्र निर्गत कर दिए जाएं। चिह्नित किए गए राज्य आंदोलनकारी शासन व प्रशासन को आंदोलन में शामिल होने के प्रमाण दिखा चुके हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें आंदोलनकारी मानने को तैयार नहीं है। आलम यह है कि चिह्नित राज्य आंदोलनकारियों को प्रमाण पत्र देने का मामला बीते 17 सालों से अधर में लटका है।
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हाईकोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया था कि 352 चिह्नित राज्य आंदोलनकारियों को प्रमाण पत्र दिए जाएं। प्रशासन ने शासकीय अभिलेख मांगते हुए कहा कि अखबार की कतरन प्रमाण की श्रेणी में नहीं है। अब अदालत में अवमानना की कार्रवाई की जा रही है।
-पूरन चंद्र पाठक, जिलाध्यक्ष राज्य आंदोलनकारी संगठन।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्य आंदोलनकारियों की बात फिर से सुनी जाए तथा उनके प्रमाण देखेे जाएं। इस संबंध में एक समिति गठित की गई थी, लेकिन कोई भी आंदोलनकारी ठोस साक्ष्य नहीं दिखा सके। अखबार की कतरन से प्रमाण पत्र दिया जाना संभव नहीं है।
- रंजना राजगुरु, डीएम बागेश्वर।