बागेश्वर। लेसानी बनलेख गांव निवासी 103 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम चंद्र जोशी अलग राज्य निर्माण के 18 साल पूरे होने के बाद भी कई गांवों के सड़क जैसी सुविधाओं से नहीं जुड़ने से आहत हैं। उनका कहना है कि गरीबी और बेरोजगारी दूर करने के लिए भी प्रभावी ढंग से काम नहीं हो पा रहा है।
भारत छोड़ो आंदोलन में 1942 में दो साल तक बरेली जेल में बंद रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जोशी ने कहा कि आजादी की लड़ाई में भारत माता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करने के लिए सब लोग एकजुट थे। लोगों को आशा थी स्वतंत्रता मिलने पर देश में जरूरत के अनुसार विकास होगा, गरीबी और बेरोजगारी दूर होगी। लेकिन इस दिशा में अब भी काफी कुछ होना है। ठीक इसी तरह के संघर्ष के बल पर अलग राज्य का भी निर्माण हुआ। लोगों को कई आश्वासन मिले थे। लोगों को आशा थी कि सरकारें राज्य की मूल अवधारणा को पूरा करेंगी।
लेकिन राज्य बने लंबा समय बीतने के बाद भी लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कई गांव अभी सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। अस्पताल हैं तो डाक्टर नहीं है। स्कूल हैं तो शिक्षक नहीं हैं। नहरों की हालत खस्ता है। बेरोजगारों और डिग्रीधारियों के चेहरों से मुस्कान गायब है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास कार्यों का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। पर्यटन और कृषि के क्षेत्र में कुछ खास नहीं हो रहा है। जोशी ने कहा कि सरकार को विकास कार्यों का लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति और विकास की दृष्टि से अति पिछड़े गांवों तक विकास कार्यों का लाभ पहुंचाने के लिए कारगर कदम उठाना चाहिए। जनप्रतिनिधियों को सादगी के साथ जनसेवा में जुटना चाहिए।