बागेश्वर। मनुष्य ने हजारों साल पहले ही चित्र बनाना शुरू कर दिया था। प्राचीन काल की गुफाओं में बनाए गए भित्ती चित्र इसके गवाह हैं। रविवार को विश्व फोटोग्राफी दिवस पर सूचना विभाग के सभागार में मीडिया कर्मियों द्वारा आयोजित गोष्ठी में ये विचार उभरकर सामने आए। वक्ताओं ने कहा कि फोटोग्राफी की खोज देश-दुनिया को एक-दूसरे के और करीब लाई। भविष्य में भी फोटोग्राफी में असीम संभावनाएं मौजूद हैं।
वक्ताओं ने कहा कि चित्र बनाना आज भी अभिव्यक्ति और रचनात्मकता प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम है। समाज की तरक्की, खुशहाली और बदलाव लाने में फोटोग्राफी की अहम भूमिका रही है। वहीं, इतिहास को समृद्ध करने के साथ ही विभिन्न संस्कृतियों के बीच समझ बढ़ाने में भी अहम योगदान दिया। दूसरी ओर समाज में बदलाव लाने में भी फोटो पत्रकारिता अहम भूमिका निभा रही है। एक अच्छी फोटो के लिए विचार और संवेदना होना जरूरी है। फोटो में ये मूलभूत गुण होंगे तो वह असरकारी होगी। तभी तो कहा जाता है कि एक फोटो हजार शब्दों के बराबर है। गोष्ठी को मीडिया कर्मियों और बुद्धिजीवियों ने संबोधित किया।
इस दौरान मीडिया कर्मियों ने सूचना विभाग परिसर में पौधरोपण भी किया। उन्होंने पौधरोपण और वनों की सुरक्षा के लिए जागरूकता पर जोर दिया। इस दौरान जिला सूचना अधिकारी डॉ. तनु मित्तल, वृक्षप्रेमी किशन सिंह मलड़ा, संजय साह, घनश्याम जोशी, चंद्रशेखर द्विवेदी, जगदीश उपाध्याय, मनीष पांडे, बसंत चंदोला, हिमांशु गढ़िया, सुंदर सुरकाली, महीप पांडे, मनीष पांडेय, रईस खान, गणेश दत्त पांडे, सुमित मेहता, खड़क राम, हयात सिंह आदि थे।