बागेश्वर। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित एससीएसटी एक्ट को संविधान की नौ वीं सूची में शामिल करने और जातिगत आधार पर पदोन्नति में आरक्षण देने की तैयारी से सामान्य वर्ग के शिक्षक, कर्मचारियों में आक्रोश है। जातिगत आधार पर आरक्षण तुष्टिकरण नीति का विरोध किया जाएगा।
विवेकानंद इंका मंडलसेरा के सभागार में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि संविधान की समीक्षा करने के क्रम में सर्वोच्च न्यायालय ने पहले आरक्षण की समीक्षा को लेकर अपने निर्णय दिए हैं। केंद्र ने उनका संज्ञान न लेकर पदोन्नति में भी आरक्षण देने के मुद्दे को हवा देने का कार्य किया है। वक्ताओं ने कहा जरूरतमंद को आरक्षण का लाभ मिले। इसके विरोध में नहीं हैं।
जरूरत यह है कि आरक्षण जातिगत नहीं जरूरत आधारित होना चाहिए। आरक्षण को राजनीति उपक्रम नहीं बनाने को कहा। बैठक में एक स्वर से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एससीएसटी एक्ट में संशोधन पर लगाई रोक जारी रखकर न्यायालय के निर्णय को अंतिम रूप से लागू करने, आरक्षण नीति की समय-समय पर समीक्षा की जाए ताकि जरूरतमंद को इसका लाभ मिल सके। पदोन्नति में आरक्षण के केंद्र के प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की मांग की। बैठक में तय किया गया कि इस मांग को लेकर 17 जून को अल्मोड़ा में आयोजित मंडल स्तरीय प्रदर्शन में बढ़ चढ़कर शामिल होने का एलान किया गया। संयोजक मंडल के लिए अवकाश प्राप्त शिक्षक प्रवीण दफौटी, भूपेश कनवाल, व्यापार मंडल के प्रतिनिधि प्रशांत पांडे को शामिल किया। वहां भूपेश कनवाल, नरेंद्र मेहता, बीएस कोरंगा, रवि जोशी, संदीप कुमार, कैलाश चंद्र, चंद्र प्रभा मिश्रा, बलवंत कालाकोटी, कमलेश पांडे, गिरीश नेगी, मोहन जोशी, मोहन सिंह, गिरीश नेगी समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे।