फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जांच में नहीं मिले डौला मामले में आरोपों के सबूत

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
बागेश्वर। लोक सभा चुनाव में मतदान में हिस्सा लेने वाले डौला के दस परिवारों ने अन्य ग्रामीणों पर जो गंभीर आरोप लगाए थे जांच में उसके कोई सबूत प्रशासन को नहीं मिले हैं। प्रशासन ने गांव में जाकर इस मामले की जांच की थी।
यहां बता दें कि डौला के ग्रामीणों ने गांव की कई समस्याओं का निदान नहीं होने की स्थिति में इस बार के लोक सभा चुनाव का बहिष्कार करने का एलान किया था।
हालांकि प्रशासन की टीम ने गांव में जाकर ग्रामीणों को मतदान के लिए राजी कर लिया था। मतदान करने व न करने को लेकर ग्रामीण दोफाड़ हो गए थे। मतदान के दिन गांव के दस परिवारों के 25 मतदाताओं ने मतदान में हिस्सा लेते हुए मतदान कर दिया था। बाद में आरोप लगाया कि जिन परिवारों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था वह उनका उत्पीड़न कर रहे हैं। इस आशय का एक ज्ञापन भी डीएम रंजना राजगुरु को सौंपा था। कहा कि गांव की प्रधान, प्रधान पति, सरपंच व पूर्व सरपंच उन्हें धमकी दे रहे हैं। डीएम के आदेश पर कपकोट तहसील प्रशासन ने गांव में जाकर आरोपों की जांच की तो कोई भी आरोप साबित नहीं हो सका। ग्रामीणों के बयान में प्रशासन ने पाया कि मामला राजनैतिक प्रतिद्वंदिता का था। जिस कारण इस मामले में बखेड़ा शुरू हो गया। प्रधान हंसी देवी, पूर्व प्रधान नैन सिंह सहित अन्य आरोपी इन आरोपों को पहले ही सिरे से खारिज कर चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह लगाए थे आरोप
- सामाजिक बहिष्कार कर दिया है।
- मंदिरों में प्रवेश पर रोक
- राशन, बिजली, पानी रोक दिया है।
- जान से मारने की धमकी
- नियम तोड़ने पर 5 हजार का जुर्माना लगेगा

डौला गांव मामले में कोई भी आरोप सच नहीं निकला है। ग्रामीणों के बयान ले लिए हैं। प्रथम दृष्टया मामला राजनैतिक प्रतिद्वंदिता का दिख रहा है। 14 अप्रैल की पूजा के लिए पूर्व में एक व्यक्ति सभी घरों से तेल व चावल आदि एकत्र करता था। लेकिन इस बार नहीं किया। सभी परिवारों ने मंदिर में जाकर ही दिया। इससे इन परिवारों को लगा कि उनका सामाजिक बहिष्कार किया है। जबकि ऐसा नहीं था।
- मैनपाल सिंह, तहसीलदार कपकोट
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें