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नाम के बड़े दर्शन के छोटे की स्थिति हो गई जीआइसी कपकोट की

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कपकोट (बागेश्वर)। तहसील मुख्यालय पर स्थापित इंटर कॉलेज को कहने को तो मॉडल विद्यालय का ओहदा मिला है मगर विद्यालय में पढ़ाने को शिक्षक तक नहीं है। महत्वपूर्ण विषयों के प्रवक्ताओं के कई पद खाली हैं। पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी और पूर्व विधायक इसी विद्यालय से पढ़े हैं। स्कूल का जर्जर भवन और खतरनाक रास्ते बच्चों की जान पर खतरा है मगर प्रशासन बेखबर है। अभिभावकों, ग्रामीणों ने स्कूल की मरम्मत और शिक्षकों की जल्द तैनाती करने की मांग की है।
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विद्यालय में 430 बच्चे पंजीकृत हैं। शासकीय उपेक्षा के चलते विद्यालय में रसायन विज्ञान, अंग्रेजी और संस्कृत विषय पढ़ाने के लिए प्रवक्ता नहीं है। प्रवक्ता न होने से बच्चों की पढ़ाई खासी प्रभावित हो रही है। विद्यालय में लिपिक का एक पद खाली है साथ ही चौकीदार तक नहीं है। स्कूल के दो कक्षा कक्ष खंडहर में तब्दील हो गए हैं। स्कूल की चहारदीवारी तक नहीं है। लाखों रुपये की लागत से बना पुस्तकालय भवन हस्तांतरित होने से पहले ही टूट-फूट गया है। वर्षों पूर्व बनी पानी की लाइन अस्तव्यस्त रहती है।

विद्यालय को जोड़ने वाला एक पैदल रास्ता पिछले दिनों हुई भारी बारिश की भेंट चढ़ गया है जबकि दूसरा जानलेवा बना हुुआ है। पीटीए अध्यक्ष महिमन कपकोटी, ग्राम प्रधान पूरन कपकोटी, बीडीसी सदस्य तारा कपकोटी ने शासन और शिक्षा विभाग से समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की है। इधर मुख्य शिक्षा अधिकारी हरीश चंद्र सिंह रावत ने बताया कि शासन से शिक्षक मिलने पर प्राथमिकता के आधार पर तैनाती की जाएगी।
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