अपर सत्र न्यायाधीश शमशेर अली ने एक फैसले में शादी का झांसा देकर युवती से जबरन शारीरिक संबंध बनाने के आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी को 20 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। अभियुक्त इस समय जेल में बंद है।
रवाईखाल स्थित मोबाइल टॉवर में काम करने वाले भीमताल के चाफी गांव निवासी योगेश वृजवासी ने शादी का झांसा देकर एक युवती से जबरन शारीरिक संबंध बनाए। पहले से ही शादीशुदा आरोपी ने पीड़िता को इसकी जानकारी किसी को देने पर जान से मारने की धमकी दी थी। पीड़िता ने साहस कर यह बात अपनी मां को बताई। इसके बाद 24 जुलाई 2016 को पीड़िता की ओर से लिखित तहरीर बागेश्वर कोतवाली में दी गई। पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। यह मामला अपर सत्र न्यायाधीश शमशेर अली के न्यायालय में चला। शासकीय अधिवक्ता फौजदारी डीके जोशी ने इस मामले में कुल पांच गवाह न्यायालय में पेश किए, जबकि अभियुक्त की ओर से साक्ष के रूप से दो गवाह पेश किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद मंगलवार को न्यायाधीश ने इस मामले में आरोपी को दोषी मानते हुए आईपीसी की धारा 376 में 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
जुर्माना नहीं देने पर छह माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। आईपीसी की धारा 347 में एक वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर एक माह के साधारण कारावास की सजा होगी। धारा 323 और 506 में छह माह का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये का अर्थदंड की सजा से दंडित किया। अर्थदंड नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी। न्यायालय ने जुर्माने की राशि अदा करने पर 20 हजार रुपये पीड़िता को दिलाने का आदेश पारित किया। इस मामले में कोतवाली पैरोकार रणजीत लाल बेरी ने पैरवी की।