बागेश्वर। जिले में पिछले वर्ष की बरसात में वन विभाग ने 3.45 लाख से अधिक पौधे रोपे थे। जंगलों की आग से इन पौधों को सुरक्षित बताया गया है। इस बार विभाग ने 4.86 पौधे रोपने का लक्ष्य रखा है। वन विभाग सूख गए पौधों के स्थान पर क्षतिपूरक पौधरोपण कैंपा योजना से करता है। फिर भी 10 से 20 प्रतिशत पौधे जम नहीं पाते हैं। काफी पौधे सूख जाते हैं। जिले में पिछले वर्ष रोपे गए अधिकतर पौधे जीवित हैं।
वर्ष 2020 में 372.26 हेक्टेयर में 3.45 लाख पौधे रोपे गए। इससे पहले वर्ष 2019 में 3.50 लाख पौधे रोपे गए थे। वर्ष 2019-20 में रोपे गए पौधे बड़े होने लगे हैं। इस बार 596.26 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 4.86 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य है। पौधे रोपने के लिए 31 मार्च तक गड्ढों को तैयार गया गया है। इस वर्ष 4.86 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य है। इनमें से 1.82 लाख पौधे क्षतिपूर्ति के रूप में कैंपा योजना के तहत पहले रोपे जाएंगे। क्षतिपूरक पौधों के लिए भी पहले ही गड्ढे तैयार कर लिए गए हैं। वन विभाग ने पिछले वर्ष पितरौड़ा के जंगल में पौधरोपण किया था। इनमें से अधिकतर पौधे जमे हैं। सूखे पौधों की संख्या काफी कम है। विभाग का दावा है कि सूखे पौधों के स्थान पर क्षतिपूरक पौधे लगाए जाएंगे। इससे सूखने वाले पौधों की पूर्ति हो जाएगी।
इस वर्ष के लिए 4.86 लाख गड्ढे खोदे गए हैं। इतने ही पौधे रोपे जाएंगे। पर्यावरण दिवस से पौधरोपण की शुुरुआत भी हो चुकी है। इस वर्ष पौधरोपण के लिए फिलहाल बजट नहीं मिला है। विभाग अपने संसाधनों से पौधरोपण कर रहा है।
- हिमांशु बागरी, डीएफओ, बागेश्वर।