कमीशन के फेर में जिले में सड़कों की गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है। इसी का नतीजा है कि, मंडी परिषद की बनाई गई सड़क तीन माह में ही उधड़ गई। बजरी और कोलतार के बजाय कोयले की राख मिलाकर डामर किया गया था।
नवंबर में जब मंडी परिषद की ओर से अमरोहा बाईपास के 500 मीटर के इस हिस्से को बनाया जा रहा था, तभी 20 नवंबर 2015 को अमर उजाला ने इस ओर ध्यान खींचा था।
अमरोहा-जोया रोड से हिल्टन कॉन्वेंट स्कूल के सामने होकर निकलने वाले बाईपास रोड का निर्माण 15 नवंबर को शुरू हुआ था। मंडी परिषद की ओर से इस मार्ग का निर्माण कराया जा रहा था। मामूली गड्ढे भरने के बाद ऊपर से कोलतार में बजरी और कोयले का चूरा मिलाकर सड़क बनाने के बजाय रोड रोलर से हल्की सी गिट्टी दबा दी गई।
आसपास के लोगों ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया था। जोया रोड से कल्याणपुर जाने वाली सड़क तक करीब पांच सौ मीटर का यह टुकड़ा बनाने के बाद काम बंद कर दिया गया था। यह टुकड़ा बनने के तीन माह बाद ही यह उधड़ चुका है।
प्रशासन और पीडब्ल्यूडी के अफसर लाखों रुपये की लागत से बनी सड़क के तीन माह में ही टूटने के बाद भी ध्यान नहीं दे रहे हैं, जो तमाम सवाल खड़े कर रहा है।
खामियां छिपाने को खोद दी थी खाई
हिल्टन के सामने से गुजरी सड़क पर वाहन न गुजरें इसलिए वहां खाई खोद दी गई थी। मकसद यह था कि वाहन गुजरेंगे तो सड़क जल्दी टूट जाएगी। लेकिन लोगों ने खाई को पाट दिया और वाहन निकाले, अब रोड के उधड़ने के बाद हालात सबके सामने हैं।
क्यों बनाया पांच सौ मीटर का टुकड़ा
अमरोहा बाईपास तो करीब 37 किलोमीटर लंबा है। इसके लिए सांसद कंवर सिंह तंवर ने प्रधानमंत्री सड़क योजना से पचपन करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन इसके बाद भी मंडी परिषद ने सिर्फ पांच सौ मीटर का टुकड़ा बनाने में विशेष रूचि क्यों दिखाई।
अमरोहा बाईपास के इस टुकड़े को मंडी परिषद ने बनाया है। सड़क पर हैवी ट्रैफिक का लोड अधिक होने के कारण सड़क उधड़ गई है। इसकी मरम्मत कराने की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की है।-अजय गोयल, अधिशासी अभियंता