अंजुमन यादगारे बका ने शहर के मोहल्ला सराय कोहना में मुशायरा आयोजित किया। जिसका आगाज हाफिज मसरूर ने नाते पाक से किया।
मुशायरे में जावेद इकबाल ने कलाम कुछ यूं पेश किया, वक्त तो बीत ही जाता है मगर हरफे वफा, गूंजता रहता है सदियों रस्नोदार के पास। जुनैद अकरम ने कहा-यूं तो चेहरे हैं कई मसकने जहां की रौनक, दिल के दरवाजे पे लिखा है तेरा नाम फकत।
संचालन कर रहे शीबान कादरी ने पढ़ा, लिख-लिख के तेरे माथे पे सजदों की इबारत, फिर बाबरी मस्जिद तुझे आबाद करेंगे। शमीम अब्बासी ने फरमाया, गले से मिलके गला काटने के रस्मो रिवाज, खता माफ तू अपने ही खानदान में रख।
अहमद रजा फराज ने कहा, खामोशी सिर पीट रही थी हंगामे की मय्यत पर, रात गए तक चीख रहा था किसके दर पर सन्नाटा। शहाब अनवर ने पढ़ा, तूफान से लड़ना मेरी किस्मत में लिखा है, तकदीर में हर शख्स के साहिल नहीं होते।
मुशायरे में नासिर अमरोही, रईस अहमद, रियाज आदिल, रियाज आदिल, जीशान शौक, जावेद उस्मानी, सरफराज गमगीन, रईस सागर, अनीस अहमद, सरताज जाफरी, जियाउद्दीन, नाजिश मुस्तफा ने भी कलाम पेश किए।