शहर के हाशमी गर्ल्स इंटर कालेज में एक शाम नूर अमरोही के नाम से मुशायरा आयोजित किया। इस अवसर पर डा.नासिर अमरोही की किताब डा.शरीफ अहमद कुरैशी बहेसियत फरहंग नवीस का विमोचन नूर अमरोही और डा.सिराजुद्दीन हाशमी के हाथों हुआ। जबकि मेहमानों को हाशमी अवार्ड से नवाजा गया। मुशायरे का आगाज असलम बकाई की नाते पाक से हुआ।
मुशायरे में नूर अमरोही ने कलाम कुछ यूं पेश किया-इस दौर में गालिब के तरफदार बहुत हैं, दुनिया में कलम कम हैं और कलमकार बहुत हैं। शीबान कादरी ने पढ़ा-देखने वाले भी पड़ जाएं परेशानी में, खुद को इतना भी परेशान न रक्खा जाए।
नासिर अमरोही ने कहा-मसलेहत ने खामोश कर डाला, लोग समझे के मर गया हूं मैं। मसरूर जौहर ने फरमाया-इफलास में भी रंग बदन का नहीं उतरा, फाके भी किए हमने तो चेहरा नहीं उतरा।
सुलेमान फराज ने पढ़ा-सर जमीने गैर पर उर्दू अलम लहरा दिया, आप की उर्दू नवाजी और मोहब्बत को सलाम। नुदरत नवाज ने कहा-करू तकसीम मैं खुद को कहां तक, जरूरत बन गया हूं हर किसी की।
चेयरमैन अफसर परवेज ने फरमाया-मैं सोचता था हंस के गुजारूंगा जिंदगी, चेहरे उदासियों के दिखाता रहा कोई। शबनम सिद्दीकी ने कहा-नफस में रूह में दिल में मेरे समाओ कभी, मैं चाहती हूं मुझे छोड़कर न जाओ कभी।
मुशायरे में अंदाज अमरोही, अनीस अहमद, डा.शरीफ अहमद कुरैशी, आले अहमद सुरूर आदि ने कलाम पेश किए। अली इमाम रिजवी, निराले मियां अंसारी, फहीम शाहनवाज, कमर नकवी, हाजी शबीह, उवैस मुस्तफा आदि मौजूद रहे।