अंजुमन तहफ्फुजे अजादारी की ओर से शहर में रविवार को हजरत इमाम हसन की शहादत पर अमारी का जुलूस बरामद किया गया।
अजादारों ने मातम किया, दौराने जुलूस इमामबाड़ों से काले अलम उतारे गए। इसी के साथ सवा दो माह से चला आ रहा शिया समुदाय में शोक समाप्त हो गया।
शहर के मोहल्ला काजीजादा स्थित इमामबाड़ा चांद सूरज से रविवार को मोहर्रम का आखिरी जुलूस बरामद हुआ। इससे पूर्व इमामबाड़े में सिब्ते सज्जाद और हमनवां ने मरसिया पढ़ा।
मौलाना सैयद अली हसनैन महलकवी ने मजलिस को खिताब करते कहा कि हजरत इमाम हसन असकरी को उनके दुश्मनों ने जहर देकर शहीद किया था। इसके बाद अंजुमने गुलजारे हैदरी ने जुलूस बरामद किया।
जुलूस में सबसे आगे ऊंट और उस पर अमारी लगी थी, जो इमामे हुसैन के काफिले की याद दिला रही थी। जुलूस मोहल्ला सद्दो, नौगईया, चाहगौरी, मजापोता, कोट, दानिशमंदान, बगला, शफातपोता, गुजरी, कटरा, मच्छरट्ठा, मंडी चौब, दरबारे कलां, अहमदनगर, कटकुई, काली पगड़ी होता हुआ जाफरी से कोकर काजीगली इमामबाड़ा छज्जी पर आकर रूका।
यहां मौलाना शहवार ने हजरत इमाम हसन असकरी के बारे में बताया। यहां से जुलूस पचदरा, सट्टी, हक्कानी होता हुआ लकड़ा में जाकर समाप्त हुआ।
जुलूस में अंजुमने मोहम्मदी, असगरी, बनी हाशिम, सज्जादिया, मासूमिया, सादात, इमामिया अकबरी, रजा हुसैनी, गुलजारे हैदरी ने नौहाख्वानी की। जहां से जुलूस गुजरता गया, वहां से काले अलम उतारे जाते रहे।
इस तरह सवा दो माह से चला आ रहा शोक समाप्त हो गया। इब्ने हैदर, सिब्जे जमाल, खुर्शीद हैदर जैदी, ताहिर अब्बास, नजीर हैदर, हुसैन हैदर, वसीम अब्बास जैदी, अफजाल मुनाजिर, सलीम मौजूद रहे। जुलूस का संचालन अंजुमन रजाकाराने हुसैनी ने किया।