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भू-माफिया फिर पाटने लगे पनवाड़ी तालाब

Sun, 15 Nov 2015 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
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जिले का सबसे बड़ा पनवाड़ी तालाब दिन रात पाटा जा रहा है। भू माफिया बेखौफ होकर पटान करा रहे हैं और अफसर आंखें बंद किए बैठे हैं। इससे पनवाड़ी तालाब का अस्तित्व खत्म हो रहा है। हाल यह है कि, भू-माफिया ने कब्जा करके इसकी भूमि पर सैकड़ों दुकान और आशियाने बनवा दिए हैं।
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अमरोहा शहर में बिजनौर रोड के दोनों तरफ पनवाड़ी तालाब फैला था। बिजनौर रोड पर पनवाड़ी तालाब लकड़ा चुंगी के पास से चलता था और किसान पेट्रोल पंप तक इसकी हद हुआ करती थी, लेकिन भू-माफिया ने सुनियोजित तरीके से धीरे-धीरे मिट्टी डालकर पटान करते-करते इसके अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिए।

हाल यह है कि, धीरे-धीरे भूमाफिया ने तालाब का पटान करके करोड़ों रुपये में प्लाटिंग कर दी। मौजूदा स्थिति यह है कि तालाब की भूमि पर आलीशान इमारतें और दुकानें, मकान बन चुके हैं और तालाब का नामोनिशान मिटने के कगार पर है। पिछले एक साल में तालाब का रकबा सिकुड़कर अब नाममात्र को ही बचा है।
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सूत्रों के मुताबिक, तालाब पटवाने में एक बड़े प्रशासनिक अफसर का भी हाथ है। तहसील के अफसर भी इसको नजरअंदाज कर रहे हैं।

हालात यह है कि सरकारी तालाब की अरबों रुपये कीमत की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हो चुका है। शहर के कई माफिया जिनमें कुछ बीड़ी निर्माता भी हैं, तालाब को पटवाकर लगातार सड़कें बनवाने के लिए मलबा और रेता डलवा रहे हैं।

कुष्क तालाब का भी मिट चुका है अस्तित्व
अमरोहा। शहर में एक कुष्क तालाब था जिसका अस्तित्व भू माफिया मिटा चुके हैं। इस बड़े तालाब में भी जेसीबी से मिट्टी का पटान कराया जा रहा है।

मिट्टी डालकर अवैध तरीके मकान भी बनाए जा रहे हैं। लेकिन कब्जा रोकने के लिए प्रशासन और पुलिस के अधिकारी कुछ नहीं कर रहे हैं।


तालाब पटने से शहर में होता है जलभराव
अमरोहा शहर में जलभराव का सबसे बड़ा कारण शहर के दोनों बड़े तालाबों का पाटा जाना ही है। तालाब पटने से पानी की निकासी बंद हो गई जोकि जलभराव का कारण बन गई है। नगर पालिका भी तालाब पाटे जाने को आंख बंद करके देख रही है।


अवैध खनन से पट रहे तालाब
अमरोहा। डिडौली के पूरनपुर और नौगावां सादात के पंजू सराय में जो अवैध खनन हो रहा है, उसकी अधिकांश मिट्टी पनवाड़ी और कुष्क तालाब में डालकर इनका पटान माफिया कर रहे हैं। एक तो तालाब पाटा जाना और दूसरे अवैध खनन दोनों अवैध काम हो रहे हैं जिन्हें प्रशासन और पुलिस के अधिकारी होने दे रहे हैं।
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