मुस्लिम कमेटी के जेरे एहतमाम में ईद मिलादुन्नबी का 10वां जलसा- ए- सीरते पाक मंगलवार की रात मोहल्ला दानिशमंदान में अंगूर वाली मस्जिद के नजदीक आयोजित हुआ।
जिसका आगाज हाफिज शमीम अमरोही ने तिलावते कुराने पाक से किया। मौलाना साद, जुबैर सैफी, असलम बकाई ने नात का नजराना पेश किया।
जलसे को खिताब करते देवबंद के आलिमेदीन मौलाना इरफान उल्ला खां ने फरमाया कि हम सब मिलकर हजरत मुहम्मद की यौमे विलादत ईदे मिलादुन्नबी मना रहे हैं। इसी के साथ रसूल के बताए रास्ते पर चलें और अपनी जिंदगी में कुरान का बोलबाला करें।
कुरान की तालीम हासिल करें और उस पर अमल करके अपनी जिंदगी में उतारें। क्योंकि अल्लाह के रसूल फरमाया है, जिसने कुराने पाक हिफ्ज कर लिया, हश्र के मैदान में जहां सारी आदम की औलाद जमा होगी, उसके मां-बाप को ताज पहनाया जाएगा।
ताज की रोशनी के सामने सूरज की रोशनी फीकी पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि जब हजरत मुहम्मद दुनिया में तशरीफ लाए, तो जिहालत थी। लेकिन आपने जहालत की तारीकी को इल्म के नूर में मुनव्वर कर दिया।
उन्होंने कहा कि रोजे अजल से इस्लाम अमन और सलामती का दीन है। जब इंसान जमीन पर पहुंचा भी नहीं था अल्लाह ने इस जमीन पर अपना घर खाना-ए-काबा बनाया और फरमाया कि यह अमन का गहवारा है।
अल्लाह ने शहरे मक्का को अमन का शहर कहा है। इस मौके पर तमाम लोग मौजूद रहे। सदारत मोहम्मद जकी कुरैशी व निजामत मुस्लिम कमेटी के सदर हाजी खुर्शीद अनवर की।