इससे जाटों ने रेलवे ट्रैक की ओर रुख ही नहीं किया। जाटों ने हरियाणा
सरकार के खिलाफ आक्रोश जताते हुए मृतकों को शहीद का दर्जा देने और परिजनों
को 50-50 लाख रुपए मुआवजा देने की भी मांग उठाई।
काफूरपुर के किसान
आदर्श स्कूल में जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले मंगलवार को जाटों का
जामवड़ा लगा। आरक्षण आंदोलन के दौरान हरियाणा में बिरादरी के लिए कुर्बान
होने वाले जाटों की आत्मा शांति के लिए चोटीपुरा स्थिति श्रीमद दयानंद
कन्या गुरुकुल की वेदपाठी छात्राओं ने यज्ञ किया। यज्ञ में आहुति देकर मृत
आत्माओं को श्रद्घांजलि देते हुए वक्ताओं ने कहा कि हरियाणा में सरकार ने
आंदोलन को विफल करने के लिए लड़ाया। इस कारण माहौल बिगड़ा। सभी बिरादरियों
के साथ सामाजिक एकता बनाए रखने की जिम्मेदारी जाटों की है।
अखिल भारतीय
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि आने
वाली पीढ़ियों के लिए कुर्बान होने वाले जाटों को समाज के लोग हमेशा याद
रखेंगे। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष मानवेंद्र वर्मा, बीएस अहलावत, सरदार
महाराज सिंह, चौधरी दिवाकर सिंह, गन्ना समिति चेयरमैन भगत सिंह बाबी, चौधरी
विजयपाल सिंह, जोरावर सिंह, 1सुनील कुमार, अरुण चौधरी, अशोक चौधरी,
धर्मपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह, जयकीरत सिंह, डा.संजीव सिंह, अंकदीप सिंह,
वरुण चौधरी मौजूद रहे। अध्यक्षता सरदार हरपाल सिंह ने की तथा संचालन अरविंद
अम्हेड़ा ने किया।
जाटों के साथ हमेशा अन्याय हुआ
श्रद्घांजलि
सभा में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल
मलिक ने कहा कि जाटों के साथ हमेशा अन्याय किया गया है। वर्ष-1956 केलकर
समिति की रिपोर्ट बनी। इसमें 70 प्रतिशत लोग शामिल जाने थे, लेकिन जाटों को
बाहर रखा गया। इसके बाद वर्ष-1977 में केलकर समिति की रिपोर्ट लागू करने
की चर्चा शुरू हुई, लेकिन इसमें भी जाटों का जिक्र नहीं किया गया। मंडल
कमीशन की रिपोर्ट से भी जाट बाहर रखे गए और जाटों को आरक्षण नहीं दिया गया।
जबकि इसकी समकक्ष बिरादरी आरक्षण का लाभ उठा रही हैं।
आरक्षण देने के बाद छीनने का पहला मामला
यशपाल
मलिक ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह व हरियाणा के दमदार नेता रहे
देवीलाल के दौर में जाटों की समकक्ष बिरादरियों को आरक्षण दे दिया गया,
मगर जाट इसमें शामिल नहीं किए गए। बाद में मिला तो उसे भी छीन लिया गया। यह
पहली बार हुआ कि आरक्षण देने के बाद भी जाटों से छीन लिया गया।
साजिश के तहत भड़काया आंदोलन
यशपाल
मलिक ने कहा कि हरियाणा में जाट शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे। मगर वहां की
प्रदेश सरकार ने आंदोलन को विफल करने की साजिश रची। गैर जाटों को जाटों से
लड़ाया गया। सरकार चाहती थी कि जाटों को मारा गया तो वह सड़क पर आएंगे तथा
आंदोलन विफल हो जाएगा। आंदोलन के दौरान अलग-अलग नेता खड़े कर दिए गए।
जाटों को संगठित करने की चुनौती थी। बमुश्किल उन्हें एकजुट किया गया। इसके
बाद सरकार जाटों की मांग पूरी करने को विवश हुई।
सामाजिक एकता बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी
समिति
के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि भाजपा के एक सांसद व हरियाणा
सरकार की साजिश के चलते जाट और गैर जाट समुदाय आमने-सामने आए। इस कारण
हरियाणा के साथ ही अन्य स्थानों पर भी सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचा है।
सामाजिक एकता को बनाए रखने के लिए गैर जाटों से अपनी बात रखने व उसे समझाने
को कहा। यशपाल मलिक ने कहा कि मेरठ की अक्खड़ भाषा के कारण जो सामाजिक
एकता में कमी आई है, उसे मुरादाबाद मंडल के जाट अपनी मीठी बोली से बनाए
रखें। उन्होंने कहा केंद्र सरकार के मंत्री संजीव बालियान ने हमें आश्वासन
दिया है। केंद्र में जाटों को आरक्षण का रास्ता साफ हो सकता है।
श्रद्घांजलि सभा में इन लोगों ने विचार रखे
भगत
सिंह बोबी, चौधरी दिवाकर सिंह, जयदेव सिंह, शूरवीर सिंह, नरेंद्र सिंह,
नेपाल सिंह, विपिन चौधरी, भूपेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, राजवीर सिंह,
मास्टर वीर सिंह, नरपत सिंह, वेदपाल सिंह आदि ने विचार रखे।