बता दें कि कंपनी के
कुछ श्रमिकों ने मंडलायुक्त को शिकायती पत्र सौंपा था। इसमें उनका कहना है
कि वर्ष 2000 से श्रमिकों के बेसिक वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
कंपनी से न तो कोई पे स्लिप दी जाती है और न ही वीडीए किया गया है। जब यह
मुद्दे उठाए गए तो उनका स्थानांतरण कर दिया गया।
मामले को संज्ञान लेकर
मंडलायुक्त ने जांच टीम गठित की है। जांच टीम शुक्रवार को कंपनी पहुंची और
जांच पड़ताल की। तीन-चार घंटे की जांच पड़ताल के बाद टीम वापस लौट गई।
जांच
टीम में मुरादाबाद के सहायक निदेशक कारखाना सुभाष विश्वकर्मा, सहायक
श्रमायुक्त प्रदीप कुमार, श्रम प्रवर्तन अधिकारी मुरादाबाद वीपी सिंह, श्रम
प्रवर्तन अधिकारी अमरोहा एनके सिंह, श्रम प्रवर्तन अधिकारी गजरौला बलीराम
थे।
श्रमिकों ने कंपनी से मिलने वाली सुविधाओं के अभाव
की शिकायत की थी। नबंवर माह में निरीक्षण किया गया था। उसके हिसाब से कंपनी
में कैंटीन शुरू हो गई है। कैंटीन में श्रमिक खाना खाते हुए पाये गए।
मेडिकल सेंटर भी बन चुका है लेकिन अभी डाक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी है।
वेंटीलेशन की कमी है। कंपनी में धुंआ आदि पाया गया है।
सुभाष विश्वकर्मा, सहायक निदेशक कारखाना, मुरादाबाद।
वेतन
के मुद्दे पर विभिन्न एक्ट के तहत जांच-पड़ताल कर रिपोर्ट तैयार की जा रही
है। कंपनी को पंद्रह दिन का समय दिया गया है। इसके बाद मंडलायुक्त को जांच
रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
प्रदीप कुमार, सहायक श्रमायुक्त, मुरादाबाद।
वर्जन-
श्रम
विभाग की जांच टीम ने शुक्रवार को कंपनी में पहुंच कर विभिन्न मामलों में
जांच की है, जांच में सभी कुछ सही पाया गया है, जो कमियां हैं उन्हें पूरा
किया जा रहा है।
गुरमीत सिंह, जीएम, एएसपी कंपनी।