प्रदेश के मुख्यमंत्री सपा नेताओं को नैतिकता की घुट्टी पिला रहे हैं, मगर पार्टी के नेता इसको गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। वहीं पुलिस अफसर भी सत्तारूढ़ दल के नेताओं के रौब के आगे नियम-कानूनों के तोड़े जाने पर भी चुप्पी साधे हुए है।
आरटीआई से इस तरह का एक मामला सामने आया है। नगर पालिका चेयरमैन अफसर परवेज को पुलिस अफसर बिना निजी खर्च व्यय जमा कराए डेढ़ साल तक गनर मुहैया कराते रहे। मामला उजागर होने के बाद गनर तो वापस ले लिया, लेकिन गनर पर खर्च व्यय की वसूली नहीं की।
नगर पालिका चेयरमैन को बिना किसी आदेश के करीब डेढ़ साल तक गनर की सुविधा दिए जाने के मामले को लेकर पुलिस महकमे के अफसरों में खलबली मची हुई है।
जनसूचना अधिकार के तहत रियासत अली हाशमी की ओर से मांगी गई जानकारी के बाद गनर तो हटा लिया गया, लेकिन 25 फीसदी निजी व्यय पर डेढ़ साल तक उपलब्ध कराए गए गनर से संबंधित राशि जमा नहीं कराई गई। पुलिस लेखा विभाग के मुताबिक वर्ष 2014 में सिर्फ 15 हजार रुपये ही चेयरमैन की ओर से जमा कराए गए हैं।
पुलिस विभाग ने गनर तो वापस ले लिया, मगर 27 अगस्त 2014 से 26 सिंतबर 2014 तक चेयरमैन से गनर रखने की 25 फीसदी निजी व्यय जमा कराने की कोशिश नहीं की।
चेयरमैन से गनर हटा लिया गया है। नियत तिथि से अधिक समय तक रहे गनर की धनराशि जमा नहीं है। इसे भी जमा कराने के लिए विभागीय प्रयास किए जा रहे हैं।
-विजय गौतम अपर पुलिस अधीक्षक