गोपाष्टमी पर गुरुवार को महिलाओं ने गोशालाओं में पहुंचकर पूजा अर्चना की। गायों को गुड़ और आटे की लोई खिलाई। वहीं हिंदू संगठनों ने गो सेवा का संकल्प लिया।
भगवान श्री कृष्ण ने जिस दिन से गोचारण शुरू किया, उस दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी का दिन था। इसी दिन गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। गुरुवार को जिलेभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ गोपाष्टमी का पर्व मनाया गया।
महिलाओं ने गोशालाओं में पहुंचकर पूजा अर्चना की। गायों को गुड़ और आटे खिलाए। उनकी सेवा का संकल्प भी लिया। वहीं, हिंदू संगठनों ने गो सेवा और संरक्षण का संकल्प लिया।
डा. अशोक कुमार रूस्तगी ने कहा कि हम सब को गायों की सेवा और संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। बाबा गंगा नाथ मंदिर के अध्यक्ष आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण का नाम गायों की रक्षा और सेवा के कारण ही गोविंद पड़ा था। इंद्र ने उन्हें गोविंद कहकर पुकरा था। गोपाष्टमी के दिन गायों की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।