तिगरी गंगा धाम गंगा मेला की तैयारियां तेज हो गईं हैं। जिला पंचायत ने इस बार फिर श्रद्धालुओं से ही लाखों रुपए वसूल कर मेले का खर्च पूरा करने का प्लान बनाया है।
इसके लिए भारी-हल्के वाहनों से यहां तक की बाइक सवार से भी टोल टैक्स और ठेका पार्किंग के नाम पर वसूली का खाका तैयार कर लिया गया है। इसके लिए पांच स्थानों पर बैरियर लगाए जाएंगे। दुकानदारों से भी सुविधा के नाम पर वसूली की जाएगी।
कार्तिक पूर्णिमा पर 20 से 26 नवंबर तक गजरौला ब्लाक के तिगरी धाम में गंगा मेला लगाया जाएगा। जिला पंचायत इस मेले की व्यवस्थाएं करती है। शासन की ओर से मेला आयोजन को कोई बजट नहीं आता है।
लिहाजा यह उत्तर भारत का प्रमुख भीड़ वाला मेला श्रद्धालुओं के सहारे चल रहा है। मेले के दौरान जिला पंचायत टोल टैक्स और वाहन पार्किंग, दुकानदारों से वसूल करती है। अलग अलग मद में इसके लिए पहले से ही ठेके दिए जाते हैं।
इसी के तहत मेले में प्रवेश करने वाले भारी से लेकर हल्के वाहन यानी बाइक सवार, बैलगाड़ी तांगा चालक तक से टोल टैक्स वसूला जाएगा। इसके लिए हाथी, ऊंट बड़ा या छोटा से पचास रुपये, कार/जीप व हल्के वाहन, जुगाड़, टाटा मैजिक, मेटाडोर, मिनी बस से 200-200 रुपये टोल टैक्स वसूले जाएंगे। घोड़ा, खच्चर तथा घोड़ा तांगा (दो पहियों की गाड़ी) जिसमें व्यावसायिक सामान लदा हो से, प्रति ट्रिप दस रुपये लिए जाएंगे।
ट्रैक्टर ट्राली और टेंपो से 50-50 रुपये, मोटर साइकिल, स्कूटर मोपेड से 20 रुपये, बस-ट्रक से 250 रुपये टोल टैक्स लिए जाएंगे। छोटा वाहन जो स्टेशन से सवारी व माल लाता है, से संपूर्ण मेला अवधि के दौरान 125 रुपये का टोल टैक्स वसूला जाएगा।
इन स्थानों पर लगेगा टोल टैक्स
तिगरी मेले के दौरान जिला पंचायत की ओर से मेले में अंदर जाने वाले वाहनों से पांच स्थानों पर टोल टैक्स वसूला जाएगा।
-गजरौला-तिगरी वाले रास्ते पर
- कांकाठेर रेलवे फाटक
-शेरपुर गंगा बांध
-कांकाठेर रेलवे स्टेशन के निकट और एक स्थान पर और टोल टैक्स लगाया जाएगा, उसका स्थान अभी निर्धारित नहीं किया गया है।
मेले में पार्किंग शुल्क भी लिया जाएगा
जिला पंचायत मेले में अंदर खड़े करने पर वाहनों से पार्किंग शुल्क भी वसूलेगा। स्कूटर/मोटर साइकिल से रोजाना दस रुपये, कार/जीप (हल्के वाहन) से पचास रुपये प्रति दिन और बस-ट्रक से रोजाना 100 रुपये पार्किंग शुल्क के लिए जाएंगे।
शासन से मेले को बजट की दरकार
अमरोहा। मेले में शासन से बजट की दरकार है। मेले को जिला पंचायत से लेकर जिला स्तरीय प्रशासनिक कमेटी की ओर से संचालित कराए जाने से श्रद्धालुओं पर अतिरिक्त मार नहीं पड़ेगी।
प्रतिवर्ष प्रदेश सरकार मेले के लिए कम से कम 70 लाख रुपये का बजट उपलब्ध कराए तो मेले का स्वरूप और भव्य हो जाएगा। वहीं श्रद्धालुओं से वसूली बंद हो जाएगी, क्योंकि श्रद्धालुओं से वसूली करके जिला पंचायत में इसका बंदरबांट हो जाता है, जो सुविधाएं श्रद्धालुओं को मिलनी चाहिए वह भी नहीं मिलती हैं।
बायो टायलेट से नहीं फैलेगी गंदगी
तिगरी मेले में इस बार प्रशासन ने बायो टायलेट के प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। इससे मेला स्थल पर गंदगी नहीं फैलेगी। गंगा को भी साफ करने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।