नगर से सटे गांव सलेमपुर गौसाईं के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधिकारी पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। ड्यूटी के दौरान अस्पताल से नदारद रहना चिकित्साधिकारी को महंगा साबित पड़ सकता है।
अमर उजाला की खबर को संज्ञान लेकर चिकित्सा अधीक्षक ने मंगलवार को सलेमपुर गौसाईं के सरकारी अस्पताल का दौरा किया। उपस्थिति रजिस्टर चेक किए। कार्य प्रणाली का जायजा दिया।
अमर उजाला की स्थानीय टीम ने सोमवार को गांव सलेमपुर गौसाईं के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया था। अस्पताल के चिकित्साधिकारी डा. गौरव त्यागी नदारद मिले। चिकित्साधिकारी के इंतजार में मरीज बैठे थे।
फार्मासिस्ट वीके शर्मा मरीजों का दवा का वितरण कर रहे थे। एलए आनंद शंकर मिश्रा, वार्ड व्याय ऋषिपाल सिंह और चौकीदार वीरेंद्र कुमार भी मौजूद थे। मौजूद मरीजों ने बताया कि अस्पताल में अधिकतर चिकित्साधिकारी नहीं आते हैं। जिससे हल्की-फुल्की बीमारी की दवा फार्मासिस्ट से मिल जाती है।
गंभीर बीमारी के इलाज के लिए गजरौला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का रुख करना पड़ता है। मंगलवार को पेज नंबर दो पर खबर प्रकाशित होने के बाद चिकित्सा अधीक्षक डा. दिनेश खत्री अस्पताल पहुंचे और निरीक्षण किया जहां चिकित्साधिकारी डा. गौरव त्यागी नदारद मिले।
उन्होंने स्टाफ से दवाओं के स्टाक की जानकारी ली और उपस्थिति रजिस्टर चेक किया। उपस्थिति रजिस्टर में डा. गौरव त्यागी आठ जनवरी नदारद मिले। पूछने पर स्टाफ ने बताया कि कोई अवकाश भी नहीं लिया गया है। चिकित्सा अधीक्षक ने रजिस्टर में आठ से 12 जनवरी तक की अनुपस्थिति लगा दी।
दो माह का पहले ही रुका है चिकित्साधिकारी का वेतन
गजरौला। चिकित्सा अधीक्षक के निरीक्षण के दौरान जानकारी मिली कि सलेमपुर गौसाईं के चिकित्साधिकारी डा. गौरव त्यागी का नबंवर और दिसंबर माह का वेतन पहले से रोक दिया गया है। पहले भी आई शिकायत में वह अधिकतर अस्पताल से नदारद मिले।
चिकित्सा अधीक्षक ने किया मरीजों का परीक्षण
गजरौला। निरीक्षण के दौरान चिकित्सा अधीक्षक ने सलेमपुर गौसाईं अस्पताल में चिकित्साधिकारी के इंतजार में बैठे मरीजों का परीक्षण किया और दवाएं दी।
प्रसव मामले में स्टाफ से मांगा स्पष्टीकरण
गजरौला। प्रसव के लिए गजरौला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से बिहार के सुधीर की पत्नी रेनू को स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा क्षेत्र की टिप्पणी कर टरका दिया गया था।
स्वास्थ्य कर्मियों की इस हिलाहवाली का खामियाजा रेनू को अपने नवजात की जान देकर चुकाना पड़ा। इस मामले में अमर उजाला की खबर पर गजरौला के चिकित्सा अधीक्षक डा. दिनेश खत्री ने अस्पताल के स्टाफ से स्पष्टीकरण मांगा है।
साथ ही स्टाफ को चेतावनी देते दी गई है कि जननी सुरक्षा योजना के रेफर मरीजों के बारे में स्टाफ उन्हें अवगत कराएगा। इसमें लापरवाही की गई तो कार्रवाई की जाएगी।
मैने मंगलवार को सलेमपुर गौसाईं के सरकारी अस्पताल का निरीक्षण किया, चिकित्साधिकारी गौरव त्यागी नदारद मिले, वह आठ जनवरी से लगातार अस्पताल नहीं आ रहे हैं और न ही अवकाश के लिए कोई पत्र दिया गया है, रिपोर्ट तैयार कर मुख्य चिकित्साधिकारी अमरोहा को भेजी जाएगी, इसके बाद अगली कार्रवाई होगी, अगली कार्रवाई तक डा. त्यागी का वेतन रोक दिया गया है। डा. दिनेश खत्री, चिकित्सा अधीक्षक, गजरौला।