एक नेटवर्किंग कंपनी ने तहसील के 749 लोगों से तकरीबन डेढ़ करोड़ रुपये जमाकरा कर दफ्तर में ताला डाल दिया। पीड़ितों में से एक 7 दिसंबर 2015 को जब आरडी की संबंधित महीने की राशि जमा कराने पहुंचा तो उसे ठगी की जानकारी हुई।
उसके बाद से उसने कंपनी के अफसरों को फोन लगाने की कोशिश की, मगर फोन बंद मिले। इसके बाद पीड़ित ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने पश्चिम बंगाल और संभल के 11 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
शहर में अमरोहा अड्डे पर पिछले साल एनबीएफसी एसएलएफ ग्रुप की ओर से एक कपंनी का कार्यालय खोला गया था। इसके बाद कंपनी के एक अधिकारी काजल विश्वास पुत्र वासदेव हाल निवासी सैदनगली ने कोतवाली क्षेत्र के गांव डगरपुरी निवासी संजय पुत्र ऋषिपाल से संपर्क किया और कपंनी की तरफ से अधिक लाभ देने के नाम पर अलग-अलग तारीखों में करीब 78 हजार रुपये जमा कराए।
इसी तरह तहसील के 749 लोगों से विभिन्न योजनाओं के तहत डेढ़ करोड़ रुपये जमा कराए। आरोप है कि, 7 दिसंबर 2015 को संजय आरडी की राशि जमा करने शाखा कार्यालय पर पहुंचे तो ताला लगा था। उसने संबंधित अफसरों को फोन किया तो उनके फोन बंद मिले। ठगी का अहसास होने पर उसने कोर्ट की शरण ली।
कोतवाली निरीक्षक ने बताया कि, कोर्ट के आदेश पर काजल विश्वास पुत्र वासदेव, संजय सरकार पुत्र चेतनचंद निवासी जुनाबाई थाना गुन्नौर संभल, सीएमडी ऐनुलशाह मुर्शिदाबाद पश्चिमी बंगाल,एमडी दीपाकंर, तरूणकांति घोष, तुषार, सुदीप्त, मिलनराय और परीमल, तुज्म्मल, एसघोष निवासी मुर्शिदाबाद पश्चिमी बंगाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।