महात्मा मूल रूप से एटा जनपद के रहने वाले थे। 1992 से सतपाल महाराज के
मानव धर्म आश्रम से जुड़े थे। सूचना मिलते ही सतपाल महाराज के तमाम अनुयायी
वहां पहुंच गए और ब्रजघाट में गंगातट पर उनके शरीर का अंतिम संस्कार किया।
इस दौरान रामप्रकाश वर्मा, अनिल वर्मा के अलावा अनुयायी और संत महात्मा
मौजूद रहे।