फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चौकीदार की गोली मारकर हत्या करने के मामले में सोमवार को पुत्र और उसके तीन दोस्तों को उम्र कैद की सजा सुनाई।
साथ ही सभी पर कुल मिलाकर 4.26 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है, जबकि साक्ष्य के अभाव में चार आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। दोषियों को पुलिस कस्टडी में जेल भेज दिया गया है।
सैदनगली थाना क्षेत्र के गांव पंसुखा मिलक निवासी बुद्धा सिंह थाने में चौकीदार था, लेकिन कोढ़ की बीमारी की वजह से उसका बेटा उमराव चौकीदार बन गया था। 24 जुलाई 2004 की रात करीब 12 बजे बुद्धा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
अगले दिन उमराव ने गांव के ही आकिल, अनवार, अली अहमद व फरमान के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद गांव में हुई पंचायत में पुलिस को बताया गया कि, बुद्धा को कोढ़ हो गया था।
इस कारण उमराव के बच्चों की शादी के रिश्ते बार-बार टूट रहे थे। उमराव ने ही पिता की हत्या की है। इस पर पुलिस ने उमराव और उसके साथी शरीफ, साजिद व अमीर अहमद के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कर ली।
दोनों मामले अदालत में एक साथ चले। सोमवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश अखिलेश दुबे ने मामले की सुनवाई की और उमराव, शरीफ, साजिद व अमीर अहमद पर हत्या का दोष सिद्ध करते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई।
उमराव पर 1.05 लाख, जबकि शेष पर 1.07-1.07 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। आकिल, अनवार, अली अहमद व फरमान को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया गया। दोषियों को पुलिस कस्टडी में जेल भेज दिया गया।