सीजेएम राजेश कुमार ने सुपुर्दगी में दी गई लकड़ी को बेचकर अदालत के आदेश का उल्लंघन करने के मामले में अभियुक्त को दो साल की कैद और ढाई हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। फिलहाल अदालत ने अपील की अवधि तक उसे जमानत पर छोड़ दिया है।
नौगावां सादात थाना पुलिस ने अरमान नामक व्यक्ति को अवैध लकड़ी के साथ गिरफ्तार किया था और उसके खिलाफ वन संरक्षण की धारा में अभियोग दर्ज किया था। अदालत ने पकड़ी गई लकड़ी को रईस अहमद पुत्र बसीर अहमद की सुपुर्दगी में इस शर्त पर दिया था कि अदालत के आदेश पर लकड़ी पेश करनी होगी और खुर्दबुर्द या बेची नहीं जाएगी।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने रईस अहमद को लकड़ी पेश करने के आदेश दिए। अदालत में पेश हुए रईस ने बताया कि उसने लकड़ी बेच दी है। अदालत ने 21 मार्च 1995 को रईस अहमद के खिलाफ आदेश के उल्लंघन, सुपुर्दगी में दी गई लकड़ी को बेचने का मामला दर्ज कराकर उसे जेल भेज दिया।
अभियुक्त कुछ समय बाद जमानत पर जेल से छूटकर आ गया। गुरुवार को सीजेएम राजेश कुमार ने मामले की सुनवाई की और रईस अहमद को दो वर्ष की कैद, ढाई हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही हाईकोर्ट में अपील की अवधि तक अभियुक्त को जमानत पर रिहा भी कर दिया।