घना कोहरा काल बन गया है, धुंध में कुछ मीटर दूर देखना भी मुश्किल हो रहा है। बुधवार रात रामपुर से दबिश देकर लौट रही हसनपुर पुलिस की बोलेरो अतरासी-हसनपुर मार्ग पर सड़क किनारे खड़े गन्ना लदे ट्राले में जा घुसी।
भीषण टक्कर के बाद बोलेरो में आग लग गई। दरोगा ने किसी तरह चालक और पुलिसकर्मियों को गाड़ी से बाहर निकाला। इस बीच एक सिपाही की मौत हो गई जबकि दरोगा समेत चार घायल हो गए। घायलों को मुरादाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां महिला कांस्टेबल की हालत नाजुक है।
हसनपुर कोतवाली पुलिस किराए पर बोलेरो लेकर रामपुर दबिश देने गई थी। रात में पुलिस टीम हसनपुर लौट रही थी, करीब साढ़े 12 बजे अतरासी-हसनपुर मार्ग पर रजबपुर थाना क्षेत्र के गांव नाजरपुर के पास बोलेरो अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े गन्ना लदे ट्राले में जा घुसी।
घना कोहरा होने के कारण चालक राजू निवासी मंडी धनौरा को सड़क किनारे खड़ा ट्राला दिखाई नहीं दिया था। भीषण टक्कर में गाड़ी का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया और आग भड़क गई। बोलेरो के गेट, शीशे ऑटो लॉक हो गए।
घायल हालत में दरोगा अरविंद मलिक निवासी गांव मखलूमपुर थाना कांधला जिला मुजफ्फरनगर ने किसी तरह शीशे तोड़कर घायल साथियों को बोलेरो से बाहर निकाला।
सूचना पर रजबपुर पुलिस भी मौके पर आ गई और घायल हालत में दरोगा अरविंद, सिपाही सुनील यादव (31) पुत्र राम नारायण यादव निवासी चील्ह (मीरजापुर), महिला सिपाही ललिता पांचाल पुत्री मोहर सिंह छपरौली (बागपत), सिपाही संजीव कुमार पुत्र राजवीर मोहम्मदपुर, मोढ़ा कलां (मुजफ्फरनगर) और चालक राजू को आनन फानन में मुरादाबाद के एक अस्पताल ले जाया गया।
यहां डाक्टरों ने सिपाही सुनील यादव को मृत घोषित कर दिया। हादसे की सूचना से पुलिस महकमे में खलबली मच गई। जबकि मृतक के परिवार में कोहराम मच गया।
पुलिस लाइन में मृतक को दी श्रद्धांजलि
अमरोहा। मुरादाबाद से पोस्टमार्टम के बाद सिपाही सुनील यादव का शव पुलिस लाइन लाया गया। यहां एसपी संजीव यादव, एएसपी विजय गौतम, सीओ सिटी शील कुमार समेत समस्त सीओ, निरीक्षक, दरोगा और साथी सिपाहियों ने पुष्प चक्र और पुष्प अर्पित कर मृतक सिपाही को श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान कई पुलिसकर्मियों की आंखें नम हो गईं। परिजनों का विलाप थमने का नाम नहीं ले रहा था। एसपी ने मृतक के परिजनों को सांत्वना देकर शव उनके सुपुर्द कर दिया।
दरोगा की दिलेरी से बच गईं जान
रजबपुर। गन्ना लदे ट्राले में टक्कर लगते ही बोलेरो में आग भड़क उठी थी। खिड़की दरवाजे ऑटो लॉक हो चुके थे। चालक राजूू समेत सभी बुरी तरह घायल थे। लेकिन दरोगा अरंविद मलिक की हालत कुछ बेहतर थी। गाड़ी के बोनेट से आग लगनी शुरू हो गई थी जो गाड़ी के नीचे तक आ पहुंची थी। दरोगा ने किसी तरह गाड़ी के शीशे तोड़कर घायल साथियों को बाहर निकाला। यदि दरोगा दिलेरी नहीं दिखाता तो और लोगों को खतरा रहता।