अमरोहा। तीन मोहर्रम को पहला मातमी जुलूस गमगीन माहौल में बरामद किया गया। अजादारों ने सीनाजनी कर मातम बरपा किया। फिजा में या हुसैन या हुसैन की सदा गूंजी। वहीं, अजाखानों में मजलिसों में जिक्रे करबला का होते ही हर आंख नम हो गई। मोहल्ला पचदरा स्थित अजाखाना वलिया से अंजुमन तहफ्फुजे अजादारी के तत्वावधान में मंगलवार को मोहर्रम की तीन तारीख का पहला हुसैनी काफिला निकला। जुलूस में सबसे आगे ऊंटों का काफिला था। जिस पर बच्चे सवार थे। इसके पीछे रोशन चौकी और अराईश थीं जो कर्बला की याद दिला रही थीं। तख्त और दुलदुल पीछे था। अजादार शहीदे करबला हुसैन, रागिबे दोशे मुस्तफा हुसैन की सदाएं बुलंद करते चल रहे थे। जुलूस पचदरा से शुरू होकर काजीजादा, सद्दो, चाहगौरी, मजापोता, कोट, दानिशमंदान, बगला, शफातपोता, कटरा गुलाम अली, गुजरी, मछरट्टा, दरबारे कलां, कटकुई, अहमदनगर, काली पगड़ी, लकड़ा, सट्टी से होते हुए देर शाम वापस पचदरा पहुंचकर संपन्न हुआ। इब्ने हैदर,कैसर मुबीन नकवी, आदिल जफर, रजा मुम्ताज, खुर्शीद हैदर जैदी, सूफी बहार, शाने मुज्तबा, कमाल हैदर नकवी मौजूद थे। इधर शहर के इमामबाड़ों में देर रात तक मजलिसों का सिलसिला जारी रहा और दौरे मंजर कर्बला सुनकर सभी की आंखें भर आईं।