अमरोहा। मोदी लहर में हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण कमल खिलाने में कामयाब रहा। सपा के कहे जाने वाले यादव और बसपा का वोट बैंक जाटव भी केसरिया रंग में रंग गए। भाजपा प्रत्याशी कंवर सिंह तंवर की जीत का यह ऐसा कामयाब फार्मूला बना जोकि इतिहास रच गया।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि सपा मुस्लिम-यादव वोट बैंक के सहारे जीत का आंकड़ा फिट कर रही थी, वहीं बसपा अपने काडर के वोट बैंक और मुस्लिम प्रत्याशी होने के नाते जीत मान रही थी। लेकिन मोदी लहर ने जब हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण किया तो यादव और जाटव वोट बैंक सीमाएं लांघकर भाजपा की ओर आकर केसरिया रंग में रंग गया। इसकी वजह सपा और बसपा से मुस्लिम प्रत्याशी होना रहा। अगर दोनों दलों से प्रत्याशी मुस्लिम नहीं होते तो शायद यह वोट बैंक भाजपा प्रत्याशी को नहीं मिलता।
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जनसभाएं करके वोट बैंक को रोकने के लिए तकरीरें भी कीं लेकिन कामयाब नहीं हो सकीं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी काडर के वोट बैंक को रोकने के लिए तमाम ऐसे तर्क दिए, लेकिन वोटरों के आगे मायावती की तकरीर का जादू नहीं चला।
मतदान के दिन यह लोग बहुत साइलेंट होकर वोट की चोट करने निकले जोकि भाजपा की जीत का मजबूत आधार बन गया। जिससे सपा-बसपा के सारे समीकरण ध्वस्त हो गए। राजनीतिक पंडितों के मुताबिक जाटवों का ध्रुवीकरण दोपहर बाद हुए मतदान के दौरान हुआ। दरअसल यादव बिरादरी इस बार सपा से इसलिए नाराज हो गई, क्योंकि प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद उसे वह अहमियत नहीं मिल पाई जो उसे पहले मुलायम सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में मिलती रही।