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गन्ने की फसल से किसानों का मोहभंग

Sun, 29 Dec 2013 05:49 AM IST
Amroha
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अमरोहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गन्ना बेल्ट पर आगामी गन्ने के सीजन में संकट के बादल मंडराएंगे। ऐसे संकेत किसानों के रुख से नजर आने लगे हैं। जिस तरह से सरकार और शुगर मिल लॉबी ने मौजूदा सीजन में किसान को परेशान किया है, उससे आहत अन्नदाता गन्ने की फसल करने से तौबा कर मुनाफे की फसलों की तलाश में जुटा है। अधिकांश किसान लाभकारी फसलों में मसाले, शाक-भाजी की खेती में भविष्य तलाश रहे हैं तो कई फूलों की खेती से भी मुनाफे का गुणा भाग कर रहे हैं।
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किसानों का मानना है कि जिस तरह गन्ना किसानों की इस साल बेकद्री हो रही है, उससे भी बदतर हालात अगले वर्ष की सीजन में होंगे। क्योंकि लोकसभा चुनाव होने को हैं, इसके बाद भी उनके प्रति सरकार की हमदर्दी नहीं दिख रही है। जिस तरह से चीनी मिलें अकेले अमरोहा जिले के ही किसानों का करीब 56 करोड़ रुपया दबाकर बैठी हुई हैं। किसानों का गन्ना भी मिलें नहीं खरीदकर माफिया का गन्ना खरीद रही हैं। किसान को मजबूरन सौ रुपये क्विंटल गन्ना बेचना पड़ रहा है। क्योंकि अगर समय पर खेत खाली नहीं किया तो गेहूं की फसल करने से भी हाथ धोने पड़ेंगे।
कौन सी फसल तैयार करेंगे? इसके लिए वह कृषि वैज्ञानिकों से राय मांग रहा है। उद्यान विभाग के भी संपर्क में है और औद्यानिक खेती जैसे मसाले, शाक-भाजी, फूलों की खेती से होने वाले मुनाफे का गुणा भाग कर रहा है।
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