जोया। जानलेवा बन चुके डेंगू और बुखार के बीच जिले में सरकारी डाक्टरों की संवेदना भी दम तोड़ चुकी है। बीमारी से दूर जीवनदाता कहे जाने वाले चिकित्सकों की तानाशाही भी मरीजों पर अपना कहर बरपा रही है। इलाज से दूर मौत का सौदा करने की फिराक में चिकित्सक जुटे हैं। जिला अस्पताल में युवक को भर्ती कर उपचार देने से हाथ खड़े करने वाले चिकित्सकों ने मौत के बाद परिजनों पर बेटे को अस्पताल तक लेकर नहीं आने का लिखित हलफनामा देने का दबाव बनाया। मौत के गम में डूबे परिजनों समेत आम लोगों का गुस्सा भड़क गया, जमकर हंगामा काटा और टीम को दौड़ा दिया।
जोया के मोहल्ला चौधरियान निवासी मुकेश (22) पुत्र चंद्रभान को शनिवार सुबह तेज बुखार आने पर परिजनों ने सीएचसी पर भर्ती कराया था। हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर किया गया लेकिन उपचार देने से दूर वार्ड में बेड खाली नहीं होने का बहाना बनाकर बीमार मुकेश और उसके परिजनों को टरका दिया गया। उपचार के लिए मेरठ ले जाते समय मुकेश की मौत हो गई, परिजनों में कोहराम मच गया। इस पर भी सोमवार को जिला अस्पताल से एक टीम कस्बे में आ धमकी। मृतक के परिजनों पर मुकेश को उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर नहीं आने का लिखित हलफनामा देने का दबाव बनाया। इंकार किया तो हंगामा खड़ा हो गया, आस-पास के लोग भी जमा हो गए। विरोध दर्ज कराते हुए टीम में शामिल लोगों को घेर लिया। और दौड़ाकर पीटा। भीड़ के चंगुल से जैसे-तैसे टीम ने भागकर जान बचाई। सेहत अफसरों के संवेदनहीन रवैये से कस्बे में हर आम और खास के बीच स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ गुस्सा पनप रहा है।