सेंटर जू ऑथरिटी (सीजेडए) ने नगर के एनटीडी में स्थित मृग विहार को मिनी चिड़ियाघर की मान्यता दे दी है, लेकिन चिड़ियाघर के सुदृढ़ीकरण के लिए बजट सीजेडए से नहीं मिला है। जिससे मिनी चिड़ियाघर को एक अच्छे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना आगे नहीं बढ़ सकी है।
नगर से करीब तीन किमी दूर एनटीडी में 1980 में करीब 38 हेक्टेयर क्षेत्र में मृग विहार स्थापित है। सिविल सोयम वन प्रभाग के अधीन इस मृग विहार में आठ तेंदुए, 90 चीतल और सांभर, एक सफेद बंदर, एक भालू के अलावा काकड़ समेत कुल 105 जानवर हैं। विभाग इन जानवरों के लिए बड़ी मुश्किल से बजट की व्यवस्था कर पाता है।
सीजेडए ने मृग विहार एनटीडी को मिनी चिड़ियाघर की मान्यता दे दी हैै। सीजेडए के मानकों के मुताबिक ही मिनी चिड़ियाघर में जानवरों के लिए बाड़े बनाए जाने हैं। मिनी चिड़ियाघर बनने के बाद देश के अन्य चिड़ियाघर से विभाग चीतल और सांभर की अदला-बदली कर अन्य जानवर यहां लाएगा। टाइगर, कस्तूरी मृग, मोनाल जैसे जानवर के लिए भी यहां की जलवायु अच्छी है। वन विभाग की मिनी चिड़ियाघर से करीब तीन किमी दूर डानागोलू मंदिर तक टॉय ट्रेन चलाने की भी योजना है, ताकि मिनी चिड़ियाघर अच्छे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो सके। यहां प्रतिवर्ष करीब चालीस हजार पर्यटक पहुंचते हैं। सीजेडए से बजट नहीं मिलने से मिनी चिड़ियाघर के सुदृढ़ीकरण का काम शुरू नहीं हो पाया है।
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चिड़ियाघर के सुदृढ़ीकरण के लिए 5.40 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक के माध्यम से सीजेडए को भेजा है। बजट अवमुक्त होने के बाद काम शुरू किया जाएगा।
आरसी शर्मा, डीएफओ, सिविल सोयम वन प्रभाग अल्मोड़ा।