अल्मोड़ा में चाय की एक दुकान में चाय की चुस्कियों के बीच राजनीति पर चर्चा करते लोग।
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अल्मोड़ा। विधानसभा चुनाव के लिए कई पार्टियों के प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होते ही चुनावी चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। बाजार, चौराहों में स्थित चाय की दुकानों में चल रही बहसों में युवा भी सक्रिय हैं। इनमें इस बात की नाराजगी है कि पांच साल यूं ही गुजर गए लेकिन समस्याएं जस की तस हैं।
शुक्रवार शाम चार बजे माल रोड में एक चाय के अड्डे पर कुछ लोग चाय के पकने का इंतजार कर रहे थे। इसके बाद चाय की एक घूंट लगाते हुए एक सज्जन बोले यार असली चुनावी रंगत तो अब देखने को मिलेगी। हाईकमान ने किसी के पर कतर दिए तो किसी के पंख लग गए। अभी वह आगे कुछ कहना ही चाह रहे थे कि इतने में दूसरे व्यक्ति बोलने लगे जैसी करनी वैसी भरनी। साल भर क्षेत्र से नेताजी गायब रहे। नेताजी जनता की जनसेवा का बखान कर टिकट की आस लगाए बैठे थे लेकिन टिकट न मिला तो पांव तले की जमीन ही धंस गई। असली रंगत तो अब देखने को मिलेगी। यह बात सुनकर एक तीसरे सज्जन कहने लगे कि नेताजी अब पंडितों को अपनी कुंडली दिखा रहे है कि उन्हें टिकट मिलेगा कि नहीं पर अपने रिपोर्ट कार्ड को नहीं देख रहे हैं। उनकी बात खत्म होते ही एक अन्य सज्जन बोले युवा पीढ़ी रोजगार की तलाश में दर-दर भटक रही है लेकिन नेताजी को इसकी कोई परवाह नहीं है। सिर्फ घोषणा पत्र में रोजगार देने के नाम पर लंबे चौड़े वायदे करते हैं। चाय पीते-पीते संदीप बिष्ट ने कहा कि कई गांवों में सड़कें नहीं है। इसका खामियाजा नेताओं को चुनाव में भुगतान पड़ेगा। हरीश पांडे बोले नेताओं को तो अब जनताजनार्दन ही न्याय देगी। इतने में विकास भी कहने लगे गावों में अब भी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क आदि की समस्याएं बनी हैं। जिससे जनता में निराशा के साथ गुस्सा भी है।