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पहाड़ के काम आ रही पहाड़ की जवानी

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अल्मोड़ा। अक्सर लोगों को कहते सुना है कि पहाड़ की जवानी पहाड़ के काम नहीं आती, लेकिन अल्मोड़ा के नौजवानों ने जरूरतमंदों की मदद कर ऐसे कहने वालों को आइना दिखाया है। कोरोना काल में महानगरों से घर लौटे ये युवा वर्क फ्राम होम के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के जरूरतमंद लोगों को राशन और अन्य जरूरी सामग्री बांटने का कार्य कर रहे हैं।
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गौरतलब है कि पहाड़ों में शिक्षा प्राप्त करने के बाद बेरोजगारी का दंश झेलने वाले युवा अक्सर मैदानी क्षेत्रों और महानगरों का रुख करते हैं। अल्मोड़ा जिले के भी कई युवा महानगरों में नौकरी करते हैं। कोरोना काल में कंपनियों में वर्क फ्रॉम होम का प्रचलन बढ़ा है। ऐसे में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बंगलूरू समेत विभिन्न महानगरों में नौकरी कर रहे अल्मोड़ा के कई युवा भी इन दिनों घर से ही काम कर रहे हें।
ऐसे ही कई युवाओं ने जरूरतमंदों की मदद का बीड़ा भी उठाया है। अल्मोड़ा निवासी बीना भट्ट, पंकज रौतेला, अजय लटवाल, हरीश बिष्ट, मंजू पांडे, नीरज बिष्ट, प्रकाश बिष्ट, मीना बिष्ट, लीला बिष्ट आदि ने टीम बनाकर ‘अपनों से अपनों के लिए मदद’ अभियान शुरू किया है। टीम के संयोजक पंकज ने बताया कि पहाड़ों में हमेशा कहावत है कि पहाड़ों की युवा शक्ति कभी पहाड़ के काम नहीं आती, हम सब युवा इस नजरिए को बदलना चाहते हैं। पिछले सप्ताह धौलादेवी ब्लॉक के गांवों से मुहिम शुरू की गई थी। इसके लिए वह आपस में ही पैसे जुट रहे हैं।
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अब तक 200 लोगों को बांटा राशन
युवाओं ने ताकुला ब्लॉक के पोखरिया, थपनिया, भैंसोड़ी, बसोली, कत्यूरा, कोटूना, पाटिया में 200 से अधिक ग्रामीण जरूरतमंद प्रति परिवार को पांच किलो आटा, पांच किलो चावल, तेल, चीनी समेत तमाम राशन किटें बांटी। टीम में विद्यार्थियों ने भी उनका सहयोग किया है।
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