चौखुटिया (अल्मोड़ा)। गैरसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र के बीच मंगलवार को चौखुटिया क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज रही। गैरसैंण जाने का प्रयास कर रहे विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के सदस्यों को पुलिस ने जगह-जगह रोक दिया। इस दौरान चौखुटिया में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई जबकि गोदी, बैरागांव और पांडुवाखाल में उत्तराखंड क्रांति दल, कांग्रेस और प्रधान संगठन के सदस्यों को रोका गया। पुलिस की सख्ती के चलते आम लोगों और यात्रियों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रमुख चौराहों पर तैनात रहा पुलिस बल
विधानसभा सत्र के मद्देनजर पुलिस-प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी है। प्रमुख चौराहों, रास्तों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए दो अस्थायी जेल भी बनाईं थीं। गैरसैंण जाने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं को रोकने के दौरान पुलिस और उनके बीच कई जगह गहमागहमी हुई। दिनभर क्षेत्र में हलचल बनी रही।
तीन स्थानों पर रोके गए संगठन के सदस्य
गोदी, बैरागांव और पांडुवाखाल में उक्रांद, कांग्रेस और प्रधान संगठन चौखुटिया के सदस्यों को रोके जाने से उनका गैरसैंण जाने का प्रयास असफल रहा। वहीं चौखुटिया में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुई बहस से माहौल गरमा गया। जगह-जगह रोक-टोक के कारण गैरसैंण की ओर जाने वाले यात्रियों सहित अन्य लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
अंकिता को न्याय दिलाने और स्थायी राजधानी को लेकर कर रहे थे कूच
चौखुटिया, द्वाराहाट के कांग्रेस कार्यकर्ता अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर और उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ता गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग को लेकर गैरसैंण को जा रहे थे। पुलिस ने दोनों ही दलों के कार्यकर्ताओं को रास्ते में रोक दिया। कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ काफी देर तक झड़प होती रही।
ग्राम प्रधानों को चौखुटिया में हिरासत में लिया
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। गैरसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान मंगलवार को अपनी समस्याएं सरकार के सामने रखने जा रहे ग्राम प्रधानों को पुलिस ने चौखुटिया में हिरासत में ले लिया। हालांकि बाद में पुलिस ने सभी ग्राम प्रधानों को छोड़ दिया।
ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष भोपाल सिंह बौरा ने कहा कि ग्राम प्रधान अपनी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने के लिए गैरसैंण जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें चौखुटिया में रोककर हिरासत में ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निरंकुश हो गई है और जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधानों की समस्याएं सुनने के बजाय उन्हें रोकना उचित नहीं है। सरकार को ग्राम प्रधानों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर उनका समाधान करना चाहिए।