ग्रामीण समाज कल्याण समिति की ओर से लघु उद्यमिता कार्यक्रम के तहत नगर के गोलना करडिया में आयोजित 12 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को कुमाऊंनी ऐपण पेंटिंग बनाने के तरीके बताए गए। वक्ताओं ने कहा कि महिलाएं ऐपण पेटिंग को स्वरोजगार के तौर पर अपनाकर आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं।
प्रशिक्षक दीपा पांडे ने कहा कि कुमाऊंनी ऐपण पेंटिंग उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा से जुड़ी एक विधा है। शादी के समय ध्यूलअर्ग चौकी, जनेऊ चौकी, सरस्वती, लक्ष्मी, शिव पीठ आदि का महत्वपूर्ण स्थान है। अब धीरे-धीरे इस कला का प्रयोग नियंत्रण कार्ड, ग्रीटिंग कार्ड, फाइल, पर्स, झोले और अन्य वस्तुओं में किया जाने लगा है। महिलाओं को इनको बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। समिति के अध्यक्ष गोपाल सिंह चौहान ने कहा कि महिलाएं ऐपण पेंटिंग को व्यवसाय के रूप में अपना कर आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं।
नीमा सांगा, धर्मा बिष्ट, पार्वती बिष्ट आदि प्रतिभागियों ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण समय-समय पर दिए जाने चाहिए। इससे महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और वह आत्मनिर्भर बनेंगी। प्रशिक्षण में ज्योति, एकता और भगवती स्वयं सहायता समूह की 25 महिलाओं ने भाग लिया। समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस मौके पर कमला बिष्ट, तारा भट्ट, दीपा मेर, माया जोशी, पनुली देवी ने विचार रखे। कार्यक्रम में दीपा शर्मा, रीता सौन, हेम बिष्ट आदि मौजूद थे।