अल्मोड़ा। पिरूल अब लोगों के लिए स्वरोजगार को जरिया बन रहा है। पिरूल से उत्पाद तैयार कर जिले की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। पिरूल के हटने से वनाग्नि की घटनाओं में भी कमी आई है। पीरूल वुमेन मंजू बीते पांच वर्षों से महिलाओं को पिरूल के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं।
अल्मोड़ा से करीब 60 किमी दूर द्वाराहाट के हाट गांव निवासी पीरूल वुमेन मंजू आर साह वर्ष 2012 में जीआईसी ताड़ीखेत में संविदा के तहत प्रयोगशाला सहायक के पद पर तैनात हुईं। उन्होंने साल 2019 में स्कूल की छात्राओं को पिरूल से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देकर अपना सफर शुरू किया। अब तक वह द्वाराहाट, रानीेखेत, बग्वालीपोखर, रुद्रप्रयाग आदि क्षेत्रों में ग्रामीण आजीविका मिशन, हस्त शिल्प विभाग, एनजीओ के माध्यम से दो हजार से अधिक महिलाओं को पिरूल से टोकरी, राखियां, बैग सहित सजावटी सामान बनाने का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। प्रशिक्षण लेकर महिलाएं स्वरोजगार स्थापित कर सालाना एक लाख से अधिक की आमदनी कर रही हैं।
मंजू की उपलब्धियां
अल्मोड़ा। मंजू को कलकत्ता में 2019 में इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में बैस्ट अपकमिंग आर्टिशियन का अवार्ड मिला। इसके साथ ही उन्हें नेपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठी में चर्मण्वती साहित्य गौरव सम्मान, उत्तराखंड उत्थान परिषद की ओर से मेरा गांव मेरा तीर्थ संवाद में सम्मान दिया। कुर्मांचल परिषद की ओर उत्तरायणी महोत्सव में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने उन्हें सम्मानित किया। भीमताल में हुई हम लै कुमाउंनी छूं प्रतियोगिता में पहला स्थान पाया।