ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद ताड़ीखेत क्षेत्र के लोगों की पेयजल समस्या का आज तक समाधान नहीं हो सका है, जबकि यहां दो-दो पेयजल योजनाएं हैं, लेकिन वितरण व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण आए दिन लोग परेशान रहते हैं। समस्या को लेकर शासन-प्रशासन के दरवाजे खटखटा चुके लोगों ने अब पांच अक्तूबर से आंदोलन करने का मन बना लिया है। लोगों का कहना है कि नीति निर्धारकों की उपेक्षापूर्ण नीति के चलते लोगों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
रानीखेत-रामनगर मोटर मार्ग पर स्थित ताड़ीखेत कस्बे को गांधी नगरी भी कहा जाता है, यहां पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने लोगों में स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जलाई थी, यहीं विकासखंड मुख्यालय भी स्थित है। कस्बे की आबादी भी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन क्षेत्र के लोग वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। कस्बे के लिए ताड़ीखेत-गगास पेयजल पंगिं योजना और एक अन्य स्रोत से बनी योजनाओं से आपूर्ति होती है, लोगों का कहना है कि वितरण व्यवस्था ठीक नहीं होने से लोगों को आए दिन पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। पेयजल का मुख्य टैंक भी ठीक नहीं है। जिस कारण लोग जल स्रोतों पर निर्भर होकर रह गए हैं। इधर स्थानीय नागरिकों ने बैठक कर अब आंदोलन की रूपरेखा तय कर ली है। तय हुआ कि पांच अक्तूबर से जनमिलन केंद्र में क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। लोगों से आंदोलन को सहयोग करने की अपील की गई।
आंदोलन के लिए ताड़ीखेत विकास संघर्ष समिति का गठन किया गया, जिसके लिए गोपाल अधिकारी अध्यक्ष चुने गए। इस अवसर पर तौड़ा की प्रधान प्रेमा आर्या, ऐरारी के विजय शंकर बिष्ट, पूर्व प्रधान चंदन सिंह, प्रकाश सिंह नेगी, ललित मोहन, चंदन नेगी, दीपक जोशी, धीरज रावत, विरेंद्र नेगी, प्रमोद रावत, दीपक रौतेला, महेंद्र रौतेला, मनोज पांडे सहित तमाम लोग मौजूद थेे। संचालन आशु भगत और महेश पांडेय ने किया।