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बगैर वार्डन चल रहा अल्मोड़ा नारी निकेतन

Thu, 03 Dec 2015 12:10 AM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, अल्मोड़ा
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 देहरादून में हुई घटना के बाद भी सरकार ने वहां मौजूद पुरुष स्टाफ को हटाने के आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन उनके स्थान पर महिला कर्मियों की तैनाती नहीं की है और न ही वर्षों से खाली पड़े पदों को भरा है। अल्मोड़ा के बख में स्थापित राजकीय महिला संरक्षण गृह (नारी निकेतन) में पांच साल से अधीक्षिका का पद रिक्त है साथ ही सात साल से सहायक अधीक्षिका का पद भी खाली पड़ा है।
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नगर से दस किमी दूर बख में जंगल के मध्य सुनसान स्थान पर नारी निकेतन स्थापित है। इस नारी निकेतन की क्षमता 75 संवासिनियों की है। काफी समय पूर्व बने इस भवन में मात्र दस कमरे हैं। इनमें ही कार्यालय भी और संवासिनियां रहती हैं। स्वीकृत क्षमता के अनुसार उपलब्ध कमरे काफी कम है। वर्तमान में यहां 11 संवासिनियां रहती हैं। इनमें से एक संवासिनी की एक साल की बेटी रहती है। इनमें से चार संवासिनियों की मानसिक स्थिति अच्छी नहीं है। इनमें से दो की उम्र 55-55 साल, 35 और 25 वर्ष है। जबकि 50 और 35 साल की दो संवासिनियां मूक बधिर हैं। अधीक्षिका का पद 2010 से खाली पड़ा है। अधीक्षिका का प्रभारी कार्यभार शिल्प शिक्षिका सुषमा टम्टा के पास है। सहायक अधीक्षिका का पद आठ साल से खाली है। सहायक शिक्षक का देहरादून तबादला हो गया है। इन्वेस्टीगेटर, चौकीदार का पद खाली है। प्रभारी अधीक्षिका समेत दो क्राफ्ट शिक्षिका, एक चपरासी, एक महिला स्वीपर हैं। वरिष्ठ सहायक पद पर पुरुष कर्मी कार्यरत हैं। संविदा रसोइयों के पद पर दो महिलाएं तैनात हैं। जबकि रात में दो महिला पीआरडी जवान तैनात रहती हैं। दिन में दो पुरुष पीआरडी जवानों की ड्यूटी रहती है। बीते 13 नवंबर को जिलाधिकारी ने नारी निकेतन का निरीक्षण किया हालांकि इस दौरान किसी प्रकार की कमियां नहीं पाई गईं।
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