चार माह से बारिश नहीं होने से भिकियासैंण ब्लाक के असिंचित क्षेत्र में बोई गई रबी की फसल में अभी तक अंकुर नहीं फूटे हैं। इस कारण सूखे जैसे हालात हो गए हैं। फसल के लिए किसानों ने साल भर मेहनत की, लेकिन अब वे मायूस होने लगे हैं।
ब्लाक का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 17181 हेक्टेयर है। जिसमें 202 राजस्व गांवों के 8542 परिवार रहते हैं। काश्तकारों के पास कुल कृषि भूमि 9510 हेक्टेयर है। इसमें 901.95 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र है जबकि 8608.05 हेक्टेयर कृषि भूमि वर्षा आधारित है। जबकि 777.28 हेक्टेयर में उद्यान हैं।
किसानों ने बीते नवंबर में गेहूं, सरसों, जौ, मटर, आलू आदि की बुआई की थी, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण अब तक बीज में अंकुर तक नहीं फूटे हैं। अब तक बारिश नहीं होने के कारण काश्तकार काफी चिंतित दिखाई दे रहे हैं। पहले जंगली जानवर खेती को नुकसान पहुंचा रहे थे, अब बारिश नहीं होने से काश्तकारों में मायूसी है।
बारिश नहीं होने से प्राकृतिक जल स्रोतों समेत जीवन दायिनी रामगंगा, गगास, नौरड, विनोद नदियों का जल स्तर तेजी से घटने लगा है। बुजुर्गों का कहना है कि ऐसा उन्होंने जीवन में पहली बार देखा है। गत वर्ष अतिवृष्टि से बर्बाद हुई रबी की फसल का मुआवजा अधिकांश काश्तकारों को आज तक नहीं मिला है।
सरकार द्वारा घोषित राहत राशि कुछ ही गांवों के काश्तकारों को वितरित की गई। पर्वतीय किसान महासभा के नेता आनंद नेगी ने सरकार से सर्वे कराकर काश्तकारों को हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग की है।