वन विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में हिस्सा लेने पहुंचे पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि जंगली जानवरों द्वारा फसलों को पहुंचाए जा रहे नुकसान से काश्तकार खेती से विमुख होते जा रहे हैं।
मानव-वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं तेज हो रही हैं। वन्य जीवों के हमलों में लोगों के घायल होने, मारे जाने और पशुओं की मौत पर सरकार द्वारा मुआवजा देने की योजना है।
मुआवजे के लिए भी लोगों को सालों का इंतजार करना पड़ता है। जंगली जानवरों के नुकसान पर प्रभावी अंकुश नहीं लगा तो पर्वतीय क्षेत्र में कुछ ही समय में खेत बंजर हो जाएंगे और पलायन भी बढ़ेगा।