सरकार जिले के आपदा प्रभावित 14 गांवों के 242 परिवारों को सालों बाद भी विस्थापित नहीं कर सकी है। जिला प्रशासन ने इन गांवों के समीप सुरक्षित स्थानों पर भूमि चयनित कर कई बार प्रस्ताव सरकार को भेज दिए हैं। 15 जून को प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नए सिरे से प्रत्येक जिले के दो अत्यधिक संवेदनशील गांवों की सूची तलब की थी पर पांच माह बाद भी मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है, जिससे आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन का मामला लटका हुआ है।
दैवी आपदा की दृष्टि से जिले के कई इलाके काफी संवेदनशील हैं। 2010 की भीषण आपदा में जिले में विभिन्न स्थानों पर 36 लोगों की मौत हो गई थी और काफी संख्या में पशुहानि हुई थी। कई गांव भूस्खलन की चपेट में थे। तहसील अल्मोड़ा के ग्राम पंचायत भैंसियाछाना के तोक बूढ़ाधार के 50 परिवार, खैरखेत में छह, बल्टा गांव के 28, सिराड़ गांव के 14, बजेठी के 10, देवली के छह, बल्टाबाड़ी और भूल्यूड़ा गांव के चार-चार, मालता के तीन परिवार आपदा से प्रभावित हुए।
इसके बाद 2013 की आपदा में भी पुन: कई स्थानों पर नुकसान हुआ। तहसील अल्मोड़ा की ग्राम पंचायत ल्वेटा के 15 परिवार, थालागूंठ के नौ परिवार, सल्ट तहसील के पनुवाद्योखन के 14, रड़गाड़ के छह, रानीखेत तहसील में इंद्रा बस्ती के 42 परिवार, चौखुटिया तहसील के बसरखेत के 13, रानीखेत तहसील में इंद्रा बस्ती के 42 परिवारों के मकान भूस्खलन की चपेट आए। प्रभावित परिवारों की मजबूरी है कि वह पंचायत घरों, स्कूलों और किराए के मकानों रह रहे हैं। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा इन परिवारों को विस्थापित नहीं करने से जाड़े और बरसात के मौसम में काफी दिक्कतें होना स्वाभाविक है।
सालों बीतने के बाद भी प्रभावित परिवारों को विस्थापन के लिए सुरक्षित स्थान भूमि उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है, जबकि जिला प्रशासन इन प्रभावित गांवों के निकट ही सुरक्षित स्थान पर भूमि चयनित कर कई बार प्रस्ताव शासन को भेज चुका है। गत 15 जून को वीडियो कांफ्रेंसिंग से मुख्यमंत्री ने नए सिरे से प्रथम चरण में प्रत्येक जिले के दो अत्यधिक संवेदनशील गांवों की सूची मांग थी। जिला प्रशासन ने अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी के ग्राम पंचायत भैंसियाछाना के तोक खैरखेत, बूढ़ाधार और बल्टा गांव के प्रभावितों परिवारों का ब्योरा भेजा था, पर अब कार्रवाई का इंतजार है।